जिला पंचायत अध्यक्ष और प्रमुख चुनाव : अंकगणित में उलझा सियासी समीकरण
बस्ती। जिले का प्रथम नागरिक बनने की सियासी जंग में समीकरणों के हल होने में पेंच फंस गया है। सत्तारुढ़ भाजपा के पास नौ जिला पंचायत सदस्य हैं तो सबसे अधिक सदस्य समाजवादी पार्टी के खेमे से जीत कर आए हैं। वहीं, सात सदस्यों को जिताने में कामयाब रही बसपा भी जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी की जोर आजमाइश में है।
हकीकत यह है कि सभी प्रमुख दल बहुमत से दूर हैं। यही वजह है कोई भी दल अभी तक जिला पंचायत अध्यक्ष के दावेदारों के चेहरों को सामने नहीं ला सका है। सत्तारुढ़ भाजपा के लिए जहां जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी का बीस साल का वनवास खत्म करने की चुनौती है। वहीं, सपा भी पंचायत चुनाव के नतीजों से उत्साहित है और कुर्सी पर काबिज होने का समीकरण तैयार कर रही है। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी इस बार पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है। इस लिहाज से पार्टियां इस कोटे से जीत कर आए जिला पंचायत सदस्यों में अध्यक्ष बनने की संभावना तलाश रही हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा से ओबीसी कोटे से जीते तीन जिला पंचायत सदस्यों को अध्यक्ष पद के दावेदार के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन पार्टी ने अभी किसी के नाम पर मुहर नहीं लगाई है।
सपा की बात करें तो कुल सोलह जिला पंचायत सदस्यों में तीन के अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी पेश करने की चर्चा है, लेकिन यहां भी अभी किसी नाम पर मुहर नहीं लगाई जा सकी है। वहीं, बसपा अभी हाईकमान के निर्देशों का इंतजार कर रही है। भाजपा जिलाध्यक्ष महेश शुक्ल ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की रणनीति तैयार की जा रही है। कई निर्दल जिला पंचायत सदस्य संपर्क में हैं। जल्द ही उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। सपा के जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए पार्टी पूरी मजबूती से उतरेगी। दो-तीन दिन में उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी जाएगी। बसपा जिलाध्यक्ष जयहिंद गौतम ने कहा कि अध्यक्ष पद के लिए पार्टी आलाकमान से जो निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार तैयारी होगी।
जिले के चौदह ब्लॉकों के प्रमुख पद के चुनाव के लिए भी सियासत तेज हो गई है। सबसे अधिक रोचक जंग उन ब्लॉकों में हो रही है, जहां राजनीतिक क्षत्रप आरक्षण के चलते खुद लड़ाई से बाहर हो गए और अब वे आरक्षित कोटे से जीत कर आए बीडीसी सदस्यों को आगे कर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण बनकटी ब्लॉक हैं, जहां सियासी दांवपेंच ने अब वर्चस्व की जंग का रूप ले लिया है।
भाजपा, सपा और बसपा ने जिला पंचायत अध्यक्ष पद की दावेदारी करने वालों को सदस्यों को सहेजने में लगा दिया है। सियासी हलके में चल रही चर्चाओं के अनुसार, माना भी यही जा रहा है कि जो सबसे अधिक सदस्यों को जोड़ने में कामयाब होगा, अध्यक्ष पद के लिए दावा भी उसी का सबसे मजबूत होगा।
जिले में भाजपा समर्थित नौ सदस्य हैं। सपा समर्थित 16, कांग्रेस समर्थित एक, बसपा समर्थित छह, भासपा समर्थित दो, भीम आर्मी समर्थित एक और अन्य आठ सदस्य हैं।