बस्ती। जिला अस्पताल के सीएमओ कार्यालय स्थित परिसर में तीन दशक से भी अधिक पुरानी जीर्णशीर्ण पेयजल टंकी कभी भी धराशायी हो सकती है। इससे जनहानि होने की भी संभावना है। अब लोगों ने जनहित में पुरानी टंकी को गिराकर नई टंकी का निर्माण कराए जाने की मांग शासन प्रशासन से की है। बताते हैं कि इस टंकी को निष्प्रयोज्य घोषित कर दिया गया है, मगर अभी इसको ध्वस्त नहीं किया गया। इससे खतरा मंडरा रहा है।
सिद्धार्थनगर में पुरानी जर्जर निष्प्रयोज्य घोषित टंकी की सीढ़ी टूटने से हुए हादसे के बाद जनपद में भी खलबली है। पुरानी टंकियों की हिस्ट्री खंगाली जा रही है। शहर की करीब दो लाख आबादी की पेयजल आपूर्ति 15 टंकियों पर निर्भर है। इसमें करीब 30 वर्ष पूर्व बनी 250 किलो लीटर व दस वर्ष पूर्व बनी 50 किलो लीटर क्षमता की टंकियां शामिल है। लेकिन 15 वर्ष पूर्व कस्बा में सर्वे को आई तकनीकी टीम ने जिला अस्पताल के सीएमओ कार्यालय में स्थित पेयजल टंकी को निष्प्रयोज्य घोषित कर कर उपयोग में न लाने व इसे गिराकर नई टंकी निर्माण कराने की आवश्यकता बताई थी। जिस पर तत्कालीन अधिकारियों ने इसे गिराकर नई टंकी निर्माण कराने की संस्तुति कर चुके हैं। लेकिन जिम्मेदार इसके प्रति उदासीन है।
बताते हैं कि अक्सर यहां दिव्यांग, कर्मचारी और अन्य फरियादी आते रहते हैं। कई बार टंकी का प्लास्टर भी छूट कर गिर चुका है। सरिया तक निकल आई है। तेज आंधी में लोग डरे-सहमे रहते हैं। बताते हैं कि उसी टंकी के नीचे कैंटीन भी चल रही है। वाहन खड़े हो रहे हैं। सीएमओ डॉ. राजीव निगम का कहना है कि टंकी निष्प्रयोज्य घोषित है। उसे क्यों नहीं ध्वस्त किया गया, इसके लिए फिर से पत्राचार किया जाएगा।