बस्ती। परशुरामपुर थाने के दरोगा अजय गौड़ की रहस्यमय मौत की गुत्थी पुलिस 12 दिन बाद भी पुलिस सुलझा नहीं पाई है। 12 दिन बाद भी डायटम रिपोर्ट पुलिस को नहीं मिल पाई है। एसपी ने शुक्रवार को डायटम रिपोर्ट के लिए रिमाइंडर भेजा है। क्योंकि पुलिस का दरोगा की मौत का पर्दाफाश का पूरा खेल इसी पर टिका है। उधर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर एसपी एम्स के डॉक्टरों से सलाह ले रहे हैं।
हालांकि, पुलिस ने अब तक की छानबीन में दरोगा की मौत को खुदकुशी साबित करने के लिए पूरा ताना-बाना बुन लिया है। गवाह भी तैयार कर लिए गए हैं। इनसे दरोगा की पत्नी रंजीता और उनकी पीसीएस भाभी ज्योति से बंद कमरे में आमने-सामने बात करा दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि पीसीएस ज्योति के क्राॅस सवालों का जवाब देने में पुलिस के गवाह चकरा गए थे। वहीं दरोगा के एडीएम भाई अरुण को पुलिस की थ्योरी पर यकीन नहीं है। उनका कहना है कि पुलिस चाहे जो कहानी गढ़ ले, मगर उसके भाई की हत्या की गई है।
बता दें कि 12 दिनों से दरोगा अजय गौड़ की रहस्यमय मौत से पर्दा उठाने के लिए पुलिस ने दिन-रात एक कर रखा है। उसकी पांच टीमें साक्ष्य जुटाने के लिए इधर-उधर भटक रही हैं। अब तक बाइक चोर को पकड़ने की चुनौती थी। बृहस्पतिवार को पुलिस की यह चुनौती भी दूर हो गई। पुलिस बाइक चोर को गिरफ्तार कर चुकी है। अब बाइक चोरी की गढ़ी गई कहानी सच है या नहीं, यह तो जांच का विषय है।
उधर, दरोगा के एडीएम भाई के कड़े तेवर को देखते हुए पुलिस इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस दरोगा की रहस्यमय मौत से पर्दा उठाने के लिए हर वह साक्ष्य जुटाने में जुटी है, ताकि मामला कोर्ट या सीबीआई में जाने पर वह अपने दावे को सच साबित कर सके।
घटना वाले दिन तीन बार पत्नी और दरोगा के बीच मोबाइल पर हुई थी बातचीत : पुलिस सूत्र बताते हैं कि घटना वाले दिन दरोगा और उसकी पत्नी रंजीता के बीच तीन बार मोबाइल पर बातचीत हुई थी। आखिरी बार दोपहर तीन बजे के आसपास बातचीत होने का पुलिस सूत्र दावा कर रहे हैं। जबकि जिस दिन आठ फरवरी को दरोगा का शव अयोध्या के सरयू नदी में मिला था, उस दिन दोपहर में अमहट घाट पर मौजूद पत्नी ने कहा था कि उनके पति का मोबाइल फोन छह फरवरी की सुबह से ही बंद था। बातचीत न होने पर थाने के सिपाही से मोबाइल पर जब पति के बारे में पूछा तो उसने कहा कि साहब आपके पास नहीं गए हैं क्या।