शहर मंगल बाजार की एक दुकान पर बिक्री के लिए रखा चीनी मांझा। संवाद
बस्ती। पाबंदी के बावजूद मौत का चीनी मांझा खुलेआम बाजारों में धड़ल्ले से बिक रहा है। इस पर रोक लगाने में पुलिस नाकाम है। अब सीएम की सख्ती के बाद पुलिस नए सिरे पर इस पर रोक लगाने का ताना-बाना बुन रही है।
घनी आबादी वाले क्षेत्र मंगल बाजार और स्टेशन रोड पर पतंग और मांझा की कई दुकानें हैं। मकर संक्रांति पर इन इलाकों में खूब पतंगबाजी होती है। लखनऊ में चीनी मांझे से बुधवार को एक शख्स की मौत के बाद जिले की पुलिस चीनी मांझा बेचने वालों की सूची तैयार कर रही है।
शुक्रवार को मंगल बाजार और स्टेशन रोड का जायजा लेने पर अधिकतर पतंग और मांझा बेचने वाले दुकानदारों ने चीनी मांझे को छिपा दिया था। पूछने पर बताया कि उनके दुकान पर देसी मांझे की बिक्री होती है। एक दुकानदार ने बताया कि यहां पर चीनी मांझा नेपाल से आता है। यह सस्ता होने के साथ ही मजबूत भी होता है। हालांकि, चीनी मांझे में बड़ी वारदात की बात अब तक सामने नहीं आई है, मगर पतंग उठाने वाले कई युवाओं के हाथ में जख्म जरूर हुए हैं। जिला अस्पताल के रिकॉर्ड में भी ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में चीनी मांझा की बिक्री की बागडोर बच्चों के हाथों में होती है। घरों पर खुली दुकानों पर अभिभावक बच्चों को दुकान में बैठाकर दूसरा काम निपटाते हैं और बच्चे पतंग और मांझा बेचते हैं। बता दें कि यहां बनने वाला मांझा सामान्य धागे से तैयार की जाती है। जबकि चीनी मांझा नायलॉन के साथ मेटलिक पाउडर का उपयोग कर तैयार किया जाता है।
जिला अस्पताल के सर्जन विजय तिवारी का कहना है कि चीनी मांझा ब्लेड से भी तेज काम करता है। क्योंकि इसमें लोहे का चूर्ण और शीशे का भरपूर मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है।
पशु प्रेमी गौहर अली ने बताया कि चीनी मांझा पक्षियों के जान का दुश्मन बन चुका है। कई पक्षियों की चीनी मांझा में फंसकर मौत हो चुकी है। चीनी मांझा का इस्तेमाल करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।