टिनिच। सल्टौआ ब्लॉक के बखरिया में चल रही श्रीराम कथा के पहले दिन कथावाचक बाल व्यास अमन शास्त्री ने राम नाम की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रभु का नाम एक है। लेकिन, नाम की महिमा करोड़ों दुर्बुद्धि को सद्बुद्धि में परिवर्तित करती है।
उन्होंने कथा को विस्तार देते हुए कहा कि राम-लक्ष्मण गुरु के साथ मिथिला के राजा जनक के पांच धनुष यज्ञ में शामिल होने जा रहे थे तो उन्हें रास्ते में एक आश्रम मिला। जहां एक विशाल शिला थी। राम ने जब गुरु विश्वामित्र से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि यह गौतम ऋषि का विश्रामालय है। यह जो पत्थर देख रहे हो, उनकी पत्नी अहिल्या है जो श्राप वश पत्थर हो गई है। तब राम ने अहिल्या को तारना चाहा, लेकिन सूर्यवंश में स्त्री को पैर से छूना मना था। राम की यह दुविधा देख पवन देव ने अपने झोकों से प्रभु के चरणों की धूल पत्थर पर डाल दी। प्रभु चरण रज पाते ही पत्थर नारी हो गई। अहिल्या को प्रगट होते ही वहां ब्रह्मा, शंकर सहित अनेक देव गण पहुंच गए। इस अवसर पर जितेंद्र मिश्र, देवेंद्र शुक्ल, राधेश्याम सहित अन्य मौजूद रहे।