लॉकडाउन के कारण हुआ विलंब, मिशन पूरा करने के लिए लेना होगा अतिरिक्त समय
8356 किमी के सापेक्ष 7560 किमी बिछ सकी पाइपलाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले में जल जीवन मिशन के तहत सिर्फ 753 राजस्व गांवों में पेयजल आपूर्ति शुरू हो सकी है। जबकि 2578 राजस्व गांवों में दिसंबर 2024 तक जलापूर्ति करने का लक्ष्य शासन ने दिया था। यह समय सीमा 31 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है। अब इसके लिए शासन से अतिरिक्त समय लेना होगा, तब जाकर जल जीवन मिशन के तहत जिले के शेष 1825 गांवों में हर घर जल अभियान पूरा हो सकेगा। तभी ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार की यह महत्वाकांक्षी परियोजना धरातल पर उतर सकेगी।
कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण वर्ष 2022 में शुरू हुई जल जीवन मिशन योजना दो साल बाद जब तक अपने निर्णायक दौर में पहुंचती, तब तक शासन से दी गई समय सीमा पूरी हो चुकी थी। शासन ने जल जीवन मिशन के तहत फेज 2, 3 व फेज 5 को सम्मिलित किया था और टेंडर के जरिये इस परियोजना को पूरा करने के लिए हैदराबाद की मेघा, तेलंगाना की जैक्सन व हैदराबाद की वीएसए जैसी तीन नामी कंपनियों को जिम्मेदारी सौंपी है।
इन कंपनियों को जिले में 860 बोरिंग व 855 टैंकों का निर्माण करना है। 8356 किमी पाइपलाइन बिछा कर जिले के दो लाख 77 हजार 157 घरों में कनेक्शन उपलब्ध कराने हैं। बावजूद इसके 855 लक्ष्य के सापेक्ष 809 टैंकों के निर्माण अधूरे होने से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। यदि औसत देखा जाए तो जल जीवन मिशन के 65 फीसदी कार्य ही पूरे हो सके हैं।
इसके तहत 860 लक्ष्य की जगह 845 बोरिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है। 8356 किमी के सापेक्ष 7560 किमी पाइपलाइन बिछ चुकी है। दो लाख 77 हजार 157 लक्ष्य की जगह दो लाख 31 हजार 983 घरों में टोटियों का कनेक्शन दिया जा चुका है।
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इन गांवों में शुरू हुई जलापूर्ति
जल निगम ग्रामीण के एक्सईएन व प्रभारी एसई जनार्दन सिंह के अनुसार, परसरामपुर ब्लॉक के रघुनाथपुर, सलेमपुर कुंवर, उजानी, ढेलापुर, परवारपारा, नेदुला व मुकुंदपुर, विक्रमजोत ब्लॉक के मल्हेनी, बहादुरपुर के भेलवल व दयालपुर, दुबौलिया के भरकुहवा, हर्रैया के भिरवा और सल्टौआ के मुस्तफाबाद समेत जिले के 753 गांवों में पेयजल परियोजना पूरी हो सकी है। यहां नियमित जलापूर्ति की जा रही है। जबकि 1825 गांवों में परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है।
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इन तीन कंपनियों को मिली है यह जिम्मेदारी
ग्रामीण जल निगम के अधिशासी अभियंता व अधीक्षण अभियंता जनार्दन सिंह के अनुसार कार्यदायी कंपनी वीएसए को 81 ट्यूबवेल, 80 टैंक, 1050 किमी पाइपलाइन बिछाने व 32086 कनेक्शन देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिनमें ट्यूबवेल का कार्य शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है और 27 टैंक भी बनकर तैयार हो चुके हैं। पाइपलाइन का कार्य भी 29952 किमी पूरा हो चुका है। दूसरी कंपनी मेघा को 677 ट्यूबवेल, 674 टैंक, 6070 किमी पाइपलाइन व दो लाख 16 हजार 343 किमी पाइपलाइन बिछाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें 659 ट्यूबवेल, 5255 किमी पाइपलाइन व 176857 कनेक्शन का कार्य पूरा हो चुका है। एक्सईएन के अनुसार तीसरी कंपनी जैक्शन को 101 ट्यूबवेल, 100 टैंक, 1247 किमी पाइपलाइन व 31527 कनेक्शन देने का लक्ष्य दिया गया है। इसमें 99 ट्यूबवेल, 1099 किमी पाइपलाइन व 25946 कनेक्शन दे दिया है। वहीं टैंक का कार्य तुरंत पूरे किए जाने का निर्देश जारी किया गया है।
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लग चुकी है आठ फीसदी पेनॉल्टी
इंजीनियरों के अनुसार, टैंक निर्माण में शिथिलता पर मेघा कंपनी पर आठ फीसदी पेनॉल्टी लगाई जा चुकी है और टर्मिनेशन नोटिस भी जारी किया गया है। इससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि समय सीमा बढ़ जाने पर परियोजना करीब छह माह के भीतर पूरी हो जाएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल का सपना पूरा हो जाएगा।
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गांवों में बिछाई जाने वाली पाइपलाइन के दौरान जो सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं, उनकी मरम्मत कार्यदायी कंपनियां करेंगी। यह उनकी जिम्मेदारी है। उन्हें 10 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। कुछ टैंकों का निर्माण अधूरा है। इसके लिए कंपनियों को तुरंत पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
- इं. जनार्दन सिंह, अधीक्षण अभियंता, ग्रामीण जल निगम