मिलावटी चायपत्ती 90 से 110 रुपये किलो, सस्ती होने से बिक रही खूब
ग्रामीण कस्बे बन गए गढ़
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपनेपन का स्वाद चखाने वाली चाय की प्याली पर भी मिलावटखोरों की नजर लग गई है। सामान्य लोकाचार का हिस्सा बन चुकी चाय धंधेबाजों की वजह से जहरीली होती जा रही है। चाय की पत्ती के कारोबारियों का कहना है कि जिले में चाय की पत्ती का कारोबार 10 से 12 लाख रुपये प्रतिदिन है। इसमें काफी बड़ा हिस्सा गैर ब्रांडेड की चायपत्ती का है। घरों में भले ही बंद पैकेट वाली चाय लोग पी रहे हों। मगर, दुकानाें पर खुली पत्ती वाली चाय मिल रही है।
बाजार में ब्रांडेड कंपनियों की चाय पत्ती के दाम 380 से 500 रुपये किलो है। जबकि खुली चायपत्ती 110 से 280 रुपये किलो तक मिल जा रही है। यदि मिलावटी चायपत्ती होगी तो 90-110 रुपये किलो मिल जाएगी। सूत्र बताते हैं पूर्वांचल में नेपाल के सटे जिलों बहराइच और लखीमपुर खीरी से बड़ी मात्रा में बोरियों और प्लास्टिक की थैलियों में मिलावटी चायपत्ती आ रही थी। अब लखनऊ और बाराबंकी भी इसका गढ़ बनता जा रहा है।
तीन दिन पहले एसटीएफ ने लखनऊ में इस गिरोह को पकड़ा था, जो चायपत्ती में गेरू, हार्ड स्टोन पाउडर व अन्य केमिकल, रंग आदि मिलाकर अलग-अलग ब्रांड के पैकेटों में पैक करते थे और प्रदेश भर में आपूर्ति करते थे। इससे पहले 2024 में बस्ती मे भी इस तरह की एक क्विंटल चायपत्ती पकड़ी गई थी।
बताया जा रहा है कि मिलावटी चायपत्ती की खपत ग्रामीण कस्बों में ज्यादा हो रही है। न्याया मार्ग स्थित एक दुकानदार ने बताया कि खुली चाय की पत्ती सस्ती मिलती है। उसका रंग भी ग्राहकों को खूब पसंद आता है। जानकार बताते हैं कि इन दुकानों पर चायपत्ती के ही कमाल से गाढ़ी एवं चटख रंग की कड़क चाय मिलती है।
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चायपत्ती में मिलावट करने वाली चीजें
कई बार पुरानी और बेकार हो चुकी चाय पत्तियों को रंग और सुगंध मिलाकर नई चायपत्ती के रूप में बेच दिया जाता है।
खराब हुए या कीड़े लगे पत्तों को भी मिलाया जा सकता है।
चायपत्ती की वजन को बढ़ाने के लिए इसमें मिट्टी या हार्ड स्टोन पाउडर मिला दिया जाता है।
चायपत्ती को आकर्षक बनाने के लिए कृत्रिम रंगों का उपयोग किया जाता है।
कभी-कभी चायपत्ती में अवनस्पतियों के स्वाद हीन सूखे पत्ते आदि मिला दिए जाते हैं।
कुछ मामलों में चायपत्ती में कागज के टुकड़े भी मिलाए जाते हैं।
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कोट
बाजार में मिलावटी चायपत्ती की बिक्री को लेकर विभाग अलर्ट हैं। लगातार चेकिंग की जाती है। पिछले दिनों कुल सात नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। इसमें केवल दो नमूनों की रिपोर्ट असुरक्षित पाई गई है।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी