संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू नदी के जलस्तर में लगातार इजाफा होने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा फिर बढ़ गया है। दुबौलिया, विक्रमजोत और कुदरहा विकास खंड के दो दर्जन से अधिक गांवों में दहशत फैल गई है। कुछ गांव पानी से घिर गए हैं। डीएम- एसपी शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लेने भी पहुंचे।
दुबौलिया संवाद के अनुसार डीएम रवीश गुप्ता, एसपी गोपाल कृष्ण चौधरी शनिवार को अति संवेदनशील तटबंध कटरिया-चांदपुर पर पहुंचे। उन्होंने पानी से घिरे सुबिका बाबू गांव के बारे में राजस्वकर्मियों से जानकारी ली। हल्का लेखपाल ने सुबिका बाबू गांव के लोगों के आवागमन के लिए दो मोटर बोट लगाने की जानकारी दी। डीएम ने बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता दिनेश कुमार से तटबंध की सुरक्षा को लेकर सवाल-जवाब किए।
इसके बाद तटबंध से होते हुए वह बिसुनदासपुर अनुसूचित बस्ती पहुंचे। यहां डीएम ने ग्रामीणों से बात की। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा। उन्होंने खलवा गांव के पास बाढ़ चौकी का निरीक्षण किया। संवेदनशील जगहों पर निगरानी के बाढ़ चौकियाें को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए। इस दौरान एसडीएम हर्रैया विनोद पांडेय, लेखपाल अजीत सिंह व अशोक पटेल मौजूद रहे।
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पानी से घिर गया सुबिका बाबू गांव
दुबौलिया। सरयू का जलस्तर बढ़ने से सुबिका बाबू गांव एक बार फिर से बाढ़ के पानी से घिर चुका है। तटबंध और नदी के पास बसे इस गांव के अलावा आंशिक टेढ़वा भी बाढ़ के पानी से घिर गया है। यहां के लोगों में दहशत हैं। जलस्तर बढ़ने से कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से लेकर खलवा गांव तक पानी का दबाव बढ़ गया है। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर 500 मीटर में दबाव बना हुआ है। संवाद
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मदरहवा में कटान, धारा में बह गया रिहायशी घर
गायघाट। दो दिन की राहत के बाद विकास खंड कुदरहा के बैराड़ी एहतमाली के मदरहवा गांव में फिर तबाही शुरू हो गई है। शनिवार को नदी तेजी से कटान करने लगी। जिससे राज बिहारी का मकान धारा में विलीन हो गया। ग्रामीण दहशत में आ गए हैं। कटान से प्रभावित लोग अपने सामान लेकर रिश्तेदारों के घर या किराए के मकान में पहुंच रहे हैं। कटान के मुहाने पर पहुुंच चुके अन्य घरों में भी भगदड़ की स्थिति बन गई है। लोग अपने गृहस्थी के सामान निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं। पुष्पा देवी ने बताया कि घर का सारा सामान अपने मायके गोरखपुर पहुंचा दी हूं। रामअवध ने गृहस्थी का सारा सामान अपने बहन के घर रख आए हैं। भगवान दास, तेरस, राम भवन, बंसीलाल ने कटान की डर से अपने घर को खाली कर दिया हैं। संवाद