बस्ती। शहर में 60 से ज्यादा घर खंडहर बने चुके हैं। कुछ में नीचे दुकानें और ऊपर मकान हैं। जब तेज आंधी आती है तो अगल-बगल के लोग कांप उठते हैं, और घरों से बाहर निकल आते हैं, लेकिन इन घरों और दुकानों में रहने वाले बेफिक्र हैं।
सस्ती किराएदारी इनकी जान जोखिम में डाले हुए है। क्योंकि जिन मकानों में यह निश्चिंत भाव से रहते हैं। वह तकनीकी रूप से नगर पालिका की सूची में ध्वस्तीकरण योग्य हो चुके हैं, मगर करीब 10 लोग इसमें दुकान चला रहे हैं, जबकि इतने ही लोग इसमें किराए पर रहते हैं। दो साल पहले तेज बारिश में दों लोगों की मौत हो गई थी, और तीन लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी अधिकारी नहीं चेते, सिर्फ मकान खाली कराने का नोटिस देकर खामोश हो गए। वहीं, जान जोखिम में डालकर लोग मौत के साए में जीने को राजी हैं।
जानकारी के मुताबिक ज्यादातर घरों और दुकानों में किराएदारी को लेकर विवाद है। यह विवाद लंबे समय से है। कम किराया होने के चलते इनमें रहने वाले लोग घरों को खाली नहीं करना चाहते हैं, लेकिन इन घरों के पड़ोसी परेशान हैं। अगर घर गिरे तो नुकसान उनकी छतों को भी होगा।
गांधीनगर में पड़ोसियों का कहना है कि कुछ दिन पहले देर रात आंधी आई थी, हम लोग परिवार के साथ बाहर निकल आए थे। नगर पालिका इन भवन मालिकों को नोटिस देकर भूल जाता है, जबकि जिला प्रशासन की ओर से आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा सकती है।
जानमाल के खतरे की परवाह नहीं
अलीनगर और पुर्दिलपुर इलाके में कई जर्जर भवन हैं। शहर के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाके में शुमार अलीनगर में रोज करीब 10 से 15 हजार लोगों की आवाजाही होती है, लेकिन हर बार बरसात में अलर्ट जारी कर सिर्फ खानापूर्ति कर ली जाती है। इन भवनों में दुकान कर रहे लोगों को भी किसी तरह का डर नहीं है। गांधी नगर चौराहे के बीच में ही एक जर्जर भवन में करीब 10 से 12 दुकानें है। यह लोग बेफिक्री से व्यापार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मकान ऊपर से दिखने में जर्जर है, जबकि नींव इसकी बहुत मजबूत है। उन्हें किसी प्रकार का डर नहीं लगता। यही हाल ओरीजोत मोड, गांधी नगर के दो अन्य आवास व दुकान, पुरानी के मंगल बाजार का है।
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बोले गृह स्वामी
गांधी नगर मुख्य बाजार में स्थित जर्जर भवन के स्वामी रघुनंदन साहू ने कहा कि मकान 100 वर्ष पुराना है। इसमें कुछ लोग किराएदारी के चलते मकान नहीं छोड़ रहे हैं। यहां कोई विवाद तो नहीं है, मगर सस्ता किराया और गांधी नगर बाजार में दुकान का लाभ लोग पा रहे हैं। मेरे परिवार ने भवन के जर्जर होने की जानकारी किराएदाराें को दे दी है, मगर उनकी सेहत पर कोई प्रभाव नहीं है। जिला प्रशासन, नगर पालिका व आयुक्त को भी स्थिति से अवगत कराते हुए पत्र लिखा गया है।
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लोग बोले
मुझे तो डर नहीं लगता है, दुकान में लोहे के पिलर लगे हैं। इसी पर पूरा भवन टिका है। ऐसे में भवन ऊपर से जर्जर तो है, लेकिन असुरक्षित नहीं है। मुझे तो भूकंप या आधी में गिरने का डर नहीं लगता है।
-गंगा मिश्र, पुरानी बस्ती
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जर्जर है, पर गिरेगा नहीं
घर के ऊपर का हिस्सा जर्जर जरूर हो गया है, लेकिन इसके नीचे लोहे के गाटर लगे हैं। इससे इसकी
नीव बहुत मजबूत है। बारिश के दौरान इसके गिरने का डर नहीं है।
-प्रदीप सिंह, गांधी नगर
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हादसे के बाद जागेगा प्रशासन
हादसे के बाद भी प्रशासन जागेगा। हमारे रिश्तेदार का घर भी यहां है, डर लगता है कि अगर कभी तेज हवा या आंधी में हादसा हुआ और भवन गिरा तो रिश्तेदार के परिवार को नुकसान हो सकता है।
-शिवा चौधरी, कटरा
किसी को चिंता ही नहीं
प्रशासन को जर्जर भवन की चिंता ही नहीं। लंबे समय से चौराहे का भवन जर्जर है। चौराहे पर भीड़ भी खूब होती है। अगर यह गिर गया तो बड़े हादसे से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
-दीपक श्रीवास्तव, पुरानी बस्ती
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जर्जर मकानों में किराएदारी का विवाद है, ऐसे में सीधे नगर पालिका कुछ नहीं कर सकता है। एक बार फिर से सर्वे करवाकर देखा जाएगा कि उन विवादों को खत्म किया गया या नहीं। रिपोर्ट के बाद उसी के अनुसार कार्रवाई करते हुए भवनों में रहने वालों को उसे खाली करवाने का निर्देश दिया जाएगा।
- दुर्गेश्वर त्रिपाठी, ईओ नगर पालिका