बस्ती। हर साल की तरह सितंबर में संभावित बाढ़ को लेकर कई गांवों में अब भी संकट नहीं टला है। यह अलग बात है कि सरयू का जल स्तर ठहर गया है, और नदी में पानी भी कम है, मगर जल स्तर नीचे जाने पर भरथापुर के कई पुरवों की करीब सौ हेक्टेयर खेती योग्य जमीन नदी ने लील ली है। इधर दुबौलिया क्षेत्र में तटबंधों का मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है, मगर संकट अब भी नहीं टाल।
क्योंकि अगस्त में ठहरा जलस्तर पिछले साल सितंबर में खूब कहर ढाया था। ग्रामीण अभी से ही सितंबर की बाढ़ को लेकर चिंतित हैं। उससे निपटने की चिंता में उनकी सांसें अटकी हैं।
यहां दुबौलिया व विक्रमजोत में सरयू व तटबंध के बीच बसे दर्जनों गांव के ग्रामीण हर साल बाढ़ का दंश झेलते हैं। तमाम सरकारें आईं और चली गईं, तमाम विकास की योजनाएं लागू हुईं और समाप्त हो गईं, लेकिन सरयू व तटबंध के बीच बसे ग्रामीणों की तकदीर नहीं बदली। बदतर जिंदगी गुजार रहे यह बाढ़ पीड़ित इसके लिए शासन प्रशासन से ज्यादा अपनी किस्मत को कोसते हैं।
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इनका दर्द हर साल बाढ़ झेलने की मजबूरी
सुविखा बाबू गांव निवासी जीतमल, स्वामीनाथ, राम नाथ आदि कहते हैं कि बाढ़ का कहर सितंबर में शुरू होता है। इसे झेलना आदत सी बन गई है। अपनी समस्या किससे कहें, जब हर साल बाढ़ झेलना मजबूरी है। साल के आठ महीने जीतोड़ मेहनत से की गई कमाई बरसात के चार माह गुजर बसर करने के लिए कम पड़ जाते हैं। बरसात शुरू होते ही धान, गन्ना मक्का आदि फसल आंखों के सामने ही बर्बाद हो जाती है। जो सहायता मिलती है, उससे इसकी भरपाई संभव नहीं है।
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इन गांवों के लोग झेलते हैं हर वर्ष बाढ़
दुबौलिया ब्लॉक के सुबिका बाबू, टेढवा, अशोकपुर ग्राम पंचायत की करीब आठ हजार की आबादी, भुवरिया, बरदियालोहार, अखनपुर, पूरेमोतीराम, टकटकवा, पाहीमाफी, बानेपुर, सरवरपुर, विक्रमजोत ब्लाॅक के भरथापुर सहित एक दर्जन गांव के ग्रामीण बाढ़ का कहर हर साल झेलते हैं।