हर्रैया। फर्जी आदेश दर्ज कराकर खम्हरिया गांव के दलित व्यक्ति की जमीन का नामांतरण कराने का मामला प्रकाश में आया है। अधिवक्ता ने जिलाधिकारी को पत्र देकर जांच की मांग की है। नायब तहसीलदार ऋषभ सिंह ने बताया कि खतौनी और अन्य अभिलेखों में दर्ज नाम के आधार पर रजिस्ट्री की जाती है। प्रकरण में कोई अनदेखी नहीं की गई है।
सिकंदरपुर क्षेत्र के खम्हरिया गांव के रतन पुत्र सतई की मृत्यु के बाद उनके भतीजे रमेश और गणेश पैतृक संपत्ति के वारिस बने। इसी बीच भूमाफिया ने गांव के ही सहज राम को भरोसे में लेकर ग्राम सभा बनाम सहज राम का फर्जी वाद दाखिल कराया। वाद के फैसले के आधार पर जमीन का नामांतरण सहज राम के नाम हुआ। इसके बाद भू माफिया ने मंजू गुप्ता, प्रेम कुमार सिंह और अब्दुल हमीद के नाम बैनामा करा लिया।
पीड़ितों ने अधिवक्ता आरबी रोशन के माध्यम से वाद की पत्रावली का निरीक्षण कराया, तो पता चला कि न तो तहसील में और न ही जिले में इस वाद की कोई पत्रावली उपलब्ध है। वहीं, तहसील के अभिलेखों में फैसले के आधार पर जमीन ग्राम सभा के नाम दर्ज दिखाई दे रही थी।