बरसांव धान क्रय केंद्र पर किसानो का इंतजार करते क्रय केन्द्र प्रभारी - संवाद
बस्ती। मोंथा चक्रवाती तूफान से धान खरीद अभियान को झटका लगा है। एक नवंबर से शुरू हुए अभियान के पहले दिन जिले के 54 सरकारी क्रय केंद्रों में से एक भी केंद्र पर धान की छटांक भर बोहनी नहीं हुई। कुछ केंद्र खुले लेकिन, काफी देर तक कोई किसान नहीं आया तो बंद कर दिए गए। कुछ केंद्रों का ताला ही नहीं खुल सका। विभाग का अनुमान है कि 15 नवंबर के बाद ही यहां धान खरीद शुरू हो पाएगी।
बस्ती जिले में इस बार 50 हजार एमटी धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित है। अनुमान था कि जिले के 1.45 हेक्टेयर में धान की इस बार अच्छी पैदावार होगी। एक सप्ताह पहले तक सबकुछ ठीक था। अगेती फसल की कटाई शुरू हो गई थी। बिचौलिए सक्रिय हो चुके थे। किसानों से सीधे धान क्रय करने के लिए वह सीधे संपर्क बनाने लगे थे। इसी बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली। पिछले तीन दिनों से लगातार मध्यम गति की वर्षा ने किसान और खरीदार सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया।
खेत में सूखने के कगार पर पहुंची धान की फसल धराशायी हो गई है। किसानों का कहना है कि चटक धूप होने पर सप्ताह भर बाद ही फसल काटने लायक रहेगी। यदि मौसम में नमी बनी रहेगी तो धान काला भी पड़ सकता है। वह अपनी फसल को लेकर काफी चिंतित है। एक अनुमान के अनुसार 70 प्रतिशत धान के फसल की कटाई होनी अभी बाकी है। कुछ किसानों ने मशीन के बजाय हाथ से कटाई करके फसल खेत में छोड़ी थी। लगातार बारिश से वह चौपट हो गई है।
किसानों का कहना है कि कटी हुई फसल से नमी पाकर अंकुर निकलने लगा है। इस बार ऐन वक्त पर प्रकृति ने धोखा दिया है। धान की पैदावार प्रभावित हो सकती है। गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। भींगने की वजह से खुले बाजार में गुणवत्ता का बहाना बनाकर आढ़ती कीमत घटाएंगे। केंद्रों पर भी नमी मापन में धान की गुणवत्ता सटीक न बैठने पर कटौती का प्रतिशत बढ़ाया जा सकता है।
इस असमंजस में किसान अभी से निराश है। वहीं एक नवंबर से धान खरीद अभियान भी शुरू हो गया है। पहले दिन कोई किसान क्रय केंद्र पर अपनी उपज बेचने नहीं पहुंचा। सरकारी मंडियों में केंद्र खोल गए लेकिन, धान बेचने के लिए किसान नहीं आए। क्रय एजेंसियों का कहना है कि अभी धान की फसल तैयार ही नहीं है। इसलिए खरीद शुरू होने में 15 दिन की देरी हो सकती है।