बस्ती। मोंथा तूफान का असर अब प्रदेश के विभिन्न इलाकों में महसूस किया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से आसमान में बादलों का डेरा है और सूरज की किरणें धुंधले बादलों के बीच छिपी नजर आ रही हैं। कई बार फुहारे पड़ने के साथ ही दिनभर हल्की ठंडी हवाएं चल रही हैं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। बदलते मौसम ने जहां आम लोगों को सर्दी की शुरुआती आहट दे दी है, वहीं किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।
ग्रामीण इलाकों में धान की फसल पूरी तरह पक चुकी है। कई किसानों ने अपनी फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए डाल रखी है। ऐसे में यदि बारिश होती है तो तैयार फसल के भीगने और खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। किसानों का कहना है कि कुछ दिन पहले तक मौसम बिल्कुल साफ था, लेकिन तूफान के प्रभाव से बादल छाने और हवा की दिशा बदलने से फसल की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
कप्तानगंज, कुदरहा, वाल्टरगंज, हर्रैया और बनकटी क्षेत्र सहित पूरे जिले में बुधवार को दिनभर बादल छाए रहे। उत्तर-पूर्वी दिशा से चल रही ठंडी हवाओं के कारण सुबह और शाम के समय धुंध जैसी स्थिति बनी रही। तापमान में करीब तीन से चार डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज अयोध्या के कृषि मौसम विज्ञान विभाग से बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के मौसम में बदलाव का क्रम जारी है। बुधवार को अधिकतम तापमान 29.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.7 डिग्री कम रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 21.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 4.0 डिग्री अधिक है।
सापेक्षिक आर्द्रता अधिकतम 77 प्रतिशत और न्यूनतम 65 प्रतिशत दर्ज की गई। हवा की औसत गति 3.0 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जो उत्तर-पूर्वी दिशा से चल रही थी। बीते 24 घंटों में किसी प्रकार की वर्षा दर्ज नहीं की गई। जारी पूर्वानुमान के अनुसार आगामी 24 घंटे के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में मध्यम से घने बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा भी हो सकती है। हवा सामान्य से तेज गति से पूर्वी अथवा पश्चिमी दिशा में बहने की संभावना जताई गई है।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. अमरनाथ मिश्र का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां खरीफ फसलों के अंतिम चरण पर असर डाल सकती हैं। किसानों को सलाह दी गई है कि वे कटाई के बाद फसलों को खुले में न रखें और सुरक्षित स्थान पर रखकर ढक दें। वहीं, आर्द्रता बढ़ने से सब्जी वर्गीय फसलों में रोग लगने की संभावना बढ़ सकती है, इसलिए किसान सतर्क रहें और आवश्यकता अनुसार फंफूदनाशी का छिड़काव करें।