आरटीओ डॉ. आरके विश्वकर्मा।
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बस्ती। सड़क हादसों की बढ़ती रफ्तार पर काबू पाने में नाकाम सड़क परिवहन मंत्रालय मोटर ट्रेनिंग स्कूलों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर चुका है। महज खानापूर्ति बनी प्रशिक्षण प्रक्रिया को उपयोगी और पारदर्शी बनाने की पहल हो चुकी है। सड़क की मौजूदा जरूरतों के हिसाब से इन स्कूलों के सिलेबस में बदलाव किया जाएगा। ट्रेनिंग स्कूल को संसाधनयुक्त बनाने के साथ ही प्रमाणपत्र देने की प्रक्रिया को जवाबदेह बनाया जाएगा। आरटीओ डॉ. आरके कुशवाहा का कहना है कि सड़क एवं परिवहन मंत्रालय से विस्तृत रूपरेखा आते ही क्रियान्वयन शुरू करा दिया जाएगा।
हादसों की रफ्तार घटाने के लिए केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की अब तक की कवायद बे-असर रही। प्रवर्तन अधिकारी भी कई बार असहाय नजर आते हैं। लखनऊ-गोरखपुर फोरलेन हो या आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस-वे जैसी चमचमाती सड़क। इन पर 150 से 200 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से फर्राटा भरने वाली अल्ट्रा-लग्जरी कार का चालक भी कई बार अनभिज्ञ होता है। न तो उसे एकाएक ब्रेक लगाने की सावधानी के बारे में पता होता है, न ही साइड लेने और डिपर के इस्तेमाल की जानकारी होती है। ऐसे ही अनाड़ी चालक भयानक हादसों की वजह बनते हैं।