गौर (बस्ती)। पर्यावरण के अनुकूल बहु उपयोगी हस्तशिल्प बनाने व कचरा प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत हो चुके बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात (अनुदेशक) कला एवं शिल्प शिक्षक आलोक शुक्ल के हाथों क्रोशिए से बनाई जा रही राखियां भी लोगों को खूब भा रही हैं। इसकी प्रशंसा डीएम, एसपी और जिला कारागार के जेल अधीक्षक ने की है। अब इनके हाथों से तैयार राखियां राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को भेंट की जाएंगी।
चार सितंबर को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रस्तावित जनपद भ्रमण कार्यक्रम को लेकर प्रशासन तैयारी में जुट गया है। वहीं गौर ब्लॉक के उच्च प्राथमिक विद्यालय कवलसिया में तैनात कला एवं शिल्प शिक्षक आलोक शुक्ल पारंपरिक हस्तशिल्प और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की अनूठी पहल कर रहे हैं। वह स्वयं इको-फ्रेंडली हस्तशिल्प बनाने में माहिर हैं। एक अगस्त से डीएम प्रियंका निरंजन के निर्देश पर जिला कारागार में सजा काट रही महिलाओं को हुनरमंद बनाने के लिए क्रोशिया से राखी बनाने का हुनर सिखा रहे हैं।
आलोक ने बताया कि आकर्षक ढंग से तैयार राखियों को डीएम ने राज्यपाल को भेंट करने का आग्रह किया है। इसको लेकर वह स्वयं तैयारियों में जुट गए हैं। उन्होंने बताया कि क्रोशिया एक पारंपरिक हस्तशिल्प कला है, जो लुप्तप्राय हो चुकी है। क्रोशिया के प्रयोग से बहुत कम लागत में राखियां तैयार की जा सकती हैं, और उनकी मजबूती व खूबसूरती सिंथेटिक राखियों से कई गुना बेहतर होती है। इसके प्रयोग से केवल सूती धागों व लकड़ी के मोतियों से एक से बढ़कर एक खूबसूरत राखियों को बनाया जा सकता है।
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इस तरह बनाई जा रहीं राखियां
आलोक बताते हैं कि सूती धागे से राखियां बनाने के लिए 12 से 14 नंबर की क्रोशिया का प्रयोग बेहतर होता है। धागों के लिए ऐंकर के पक्के रंगों की लच्छियां व रक्षासूत्र का प्रयोग किया जा सकता है। सजावट के बाजार में आसानी से उपलब्ध लकड़ी की रंग-बिरंगी मोतियों का प्रयोग किया जा रहा है। एक राखी को तैयार करने में 25 से 45 रुपये की लागत पैकिंग के साथ आ रही है। एक राखी बनाने में तीस से पचास मिनट का समय लगता है। ज्यादा सजावटी राखी में से एक से दो घंटे भी लग जाते हैं।
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क्रोशिया से बनी राखियां हैं पर्यावरण के अनुकूल
आलोक बताते हैं कि सूती धागे व लकड़ी की मोतियां दोनों ही बायोडिग्रेडेबल यानि की स्वतःसड़नशील हैं। जो कहीं भी फेंके जाने पर पर्यावरण या मिट्टी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। सूती धागे का अपघटन समय आठ से 12 सप्ताह व लकड़ी का दो से चार सप्ताह हो सकता है।