पहले कागज में जिंदा हुआ मृतक, फिर किया काम और लिया भुगतान
मृतक ने डेढ़ साल तक मनरेगा में किया काम
- विक्रमजोत ब्लॉक के जैतापुर गांव का मामला
- 16 अगस्त 2020 को हो गई थी मौत, पहली से 16 दिसंबर 2021 तक किया काम
- 15 जनवरी 2022 को मृतक बाबू लाल के खाते में पहुंचा 3026 रुपये मजदूरी, आहरित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। अपने जिले की व्यवस्था शासन के जीरो टारलेंस नीति पर भारी है। तभी तो विक्रमजोत के जैतपापुर गांव में मनरेगा के तहत ऐसे श्रमिक से काम लिया गया, जो डेढ़ साल पहले ही दुनिया छोड़कर जा चुका था। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि मृतक के खाते में उसकी मजदूरी भी भेजी गई और मजदूरी की रकम निकाली भी गई। और तो और मृतक 2022 तक मनरेगा में कार्य करता रहा।
मनरेगा में गोलमाल की शिकायत अक्सर आती है, मगर जांच पड़ताल के बाद ऐसे मामलों में लीपापोती कर दी जाती है। आईजीआरएस पोर्टल की सूचना को जैसे-तैसे निस्तारित कर जिम्मेदार पीछा छुड़ा लेते हैं। ऐसा ही एक मामला विक्रमजोत ब्लॉक में सामने आया है। इसे लेकर जिम्मेदार केवल जांच की बात कह रहे हैं।
विक्रमजोत ब्लाक के जैतापुर गांव निवासी बाबू लाल की मृत्यु 16 अगस्त 2020 को हुई। इसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी जारी हो गया। इसके बाद गांव में मिट्टी का कार्य शुरू हुआ तो मृतक बाबू लाल को पहली से 16 दिसंबर 2021 तक काम मिला और इसके खाते में 15 जनवरी 2022 को उसके खाते में मजदूरी का 3026 रुपये भी पहुंचा, जिसे उसने आहरित कर लिया। कागजों में मृत बाबू लाल ने पहली से 16 दिसंबर 2021 तक मिट्टी ढोने का काम किया है।
विक्रमजोत ब्लॉक के बीडीओ अनिल कुमार यादव कहते हैं कि इस तरह का मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा हुआ है तो अभिलेखों की जांच कराकर इसके लिए जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मृतक को दिए गए पारिश्रमिक की रिकवरी कराई जाएगी।