कुदरहा। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा गारंटी अधिनियम लागू होने के बावजूद ब्लॉक
में गरीबों के निवालों पर गल्ला माफियाओं का डाका बदस्तूर जारी है। एसडीएम
सदर के निर्देश पर शनिवार को सुबह करीब पांच बजे चिलवानिया गांव में
डीसीएम पर लदा 40 क्विंटल राशन (चीनी, गेहूं व चावल) पुलिस ने पकड़ा।
इसकी
भनक लगते ही माफिया सक्रिय हो गए। कलवारी इंस्पेक्टर से साठगांठ कर राशन
को छुड़ा लिया। गुस्साए गांव वालों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
पुलिस की इस कार्य प्रणाली से उपजिलाधिकारी हैरान हैं। एसडीएम राम प्रसाद
ने बताया कि गांव वालों की शिकायत पर एसओ को वहां पर
भेजा था। जब दूसरी बार खाद्यान छोड़ देने की बात कही गई। तो वे सुनकर अवाक
रह गए। आगे कहा कि उनकी बिना जानकारी के राशन को छोड़ा जाना गंभीर बात है।
वह स्वंय मामले की जांच करेंगे।
शुक्रवार की देर रात 2.30 बजे
चिलवानिया गांव में कोटेदार की दुकान पर खाली ट्रक खड़ा हुआ। तभी गांव के
उमेश यादव, रमानंद, राम मूरत राजभर, रामनाथ, साहब राम, इन्द्रावती, कलावती,
शीला, राम मिलन, गुड़िया आदि की नींद खुल गई। देखा कि राशन कार्डों पर
वितरण के लिए आया राशन गोदाम से निकाल कर ट्रक पर रखा जा रहा है।
धीरे-धीरे
गांव के और लोग एकत्रित होकर काला बाजारी रोकने के लिए मुकामी थाने और
एसडीएम सदर राम प्रसाद को टेलीफोन कर सूचना दी। एसडीएम ने कलवारी एसओ
अखिलेश कुमार सिंह को राशन पकड़ने का निर्देश दिया। पुलिस ने राशन लदे ट्रक
को पकड़ लिया।
गांव वालों को कार्रवाई का भरोसा देकर पुलिस राशन
को ले गई। इसकी भनक राशन माफिया को लग गई और आनन फानन मुकामी पुलिस से
मिलकर राशन सहित ट्रक को छुड़ा लिया। इसकी जानकारी एसडीएम को हुई तो वह
पुलिस के इस कदम से हैरानरह गए। उधर, गल्ला छोड़ने से गांव वालों का गुस्सा
चरम पर पहुंच गया। उन्होंने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
एसओ
ने बताया कि ट्रक में चावल, गेहूं, चीनी नहीं, बल्कि धान था। इसी वजह से
ट्रक को छोड़ दिया गया। एसओ के इस जवाब से कई और सवाल खड़े हो गए। इसका
जवाब मिलना बाकी है। यदि गाड़ी में किसान का धान था। रात में ले जाने क्या
आवश्यकता थी।