बस्ती/गौर। किसानों की ऊसर जमीनों को उपजाऊ बनाने के लिए जिले में चलाई जा
रही भूमि सेना योजना परवान चढ़ाने से पहले ही पटरी से उतर गई है। इस योजना
में सरकार लाखों रुपये खर्च करती है, तब जाकर उपजाऊ जमीन तैयार हो पाता है।
उपजाऊ जमीन बनाने के लिए जिप्सम खाद की अहम भूमिका होती है। मगर विभाग
लाखों रुपये की जिप्सम खाद को खेत में डालने के बजाए सड़क किनारे फेंक
दिया।
इसका खुलासा शनिवार को डीएम अनिल कुमार दमेले द्वारा परियोजना
निदेशक डीएआरडीए डीपी सिंह से कराई जांच में हुआ। जांच में दो ट्रक जिप्सम
सड़क के किनारे पड़ा मिला। जबकि इस खाद को अप्रैल में ही खेतों पर पड़
जाना था। इसके लिए योजना के संचालक जिला भूमि संरक्षण अधिकारी को नोटिस
जारी किया गया है।
हालांकि भूमि संरक्षण अधिकारी सुभाष मौर्य कहते
हैं कि खाद सड़क पर डालने की जानकारी उन्हें नहीं है। जांच कराकर दोषियों
के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। वहीं भाकियू के मंडल महासचिव शोभाराम ठाकुर
ने बताया कि इसके लिए भूमि संरक्षण अधिकारी और आहरण वितरण अधिकारी
जिम्मेदार हैं।
वर्ष 2014-15 में भूमि सेना योजना के तहत विकास खंड
गौर के ग्राम असनहरा में किसानों के 50 हेक्टेअर ऊसर जमीन का चयन किया
गया। इसके लिए 100 मीट्रिक टन जिप्सम खाद सरकार की ओर से मिली। एक टन
जिप्सम की सरकारी कीमत 4200 रुपये है। इस तरह चार लाख 20 हजार रुपये का
जिप्सम आया।
गांव के किसान राम अछैबर, मंगरू, राम बहाल, रामनरेश,
सैयदा व मुसिलम ने बताया कि भूमि सेना योजना के तहत गांव में 50 हेक्टेअर
ऊसर भूमि को उपजाउ बनाना था। मगर विभाग द्वारा कुछ ही किसानों की भूमि की
मेड़बंदी की गई, जब कि सभी किसानों की जमीनों की मेड़बंदी करनी थी।
विभाग
ने न तो मेड़बंदी कराई और न ही जिप्सम ही डलवाया। बल्कि खाद को खेतों में
डालने के बजाए सड़क किनारे फेंक दिया गया। किसानों ने जांच टीम को बताया कि
विभाग ने सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। असल में किसानों को इस योजना का
लाभ ही नहीं मिला।
जांच करने गए पीडी ने बताया कि सड़क किनारे दो
ट्रक जिप्सम पड़ा मिला। गांव वालों ने बताया कि यह खाद दो साल से सड़क के
किनारे पड़ी है। बताया कि इसकी रिपोर्ट डीएम को की गई है, इससे पहले विभाग
के अधिकारी को नोटिस जारी किया गया है।