बस्ती। एनएचएम के स्कूल हेल्थ प्रोग्राम में वाहनों की आपूर्ति के लिए स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन अफसरों ने गोलमाल किया। प्रक्रिया पूरी कराए बगैर चहेते को विभागीय साठ-गांठ से वाहन आपूर्ति का काम सौंप दिया गया। नियम को दरकिनार कर दो साल के लिए ठेकेदार की नियुक्ति विभाग ने कर दी थी। अपर निदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डॉ. सीके शाही ने जब इसकी जांच शुरू की तो सब कुछ सामने आ गया। हालांकि, प्रक्रिया पूरी न होने के कारण तमाम अभिलेखों का प्रयोग ही नहीं किया गया, मगर इसे निरस्त कर नए सिरे से ई-टेडरिंग के निर्देश एडी हेल्थ ने दिए हैं।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य गारंटी योजना के तहत स्कूल हेल्थ प्रोग्राम में जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों पर वाहनों की आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई। वर्ष 2015-16 में इसके निविदा का प्रस्ताव के बाद इसे गजट कराया गया, मगर तकनीकी कारणों से इस निविदा में खेल कर दिया गया। तत्कालीन सीएमओ डॉ. जेपी सिंह और विभाग के कुछेक कर्मियों ने साठ-गांठ कर अपने चहेते ठेकेदार को बैक डोर से काम दे दिया। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए एक कमेटी गठित की गई थी, जो वाहन के टेंडर के लिए ठेकेदार को अधिकृत करती। चूंकि यह टेंडर बैकडोर से दिया गया था, ऐसे में कमेटी को बुलाकर हस्ताक्षर तो कराए गए, मगर कमेटी में शामिल एक सदस्य उन दिनों बाहर था। इसके चलते उस सदस्य के हस्ताक्षर भी नहीं हो सके। इधर, शासन ने कार्यक्रम को संपादित कराने के लिए दबाव बनाया तो आनन-फानन वाहनों की आपूर्ति कर दी गई। यह भी नहीं देखा गया कि जो वाहन स्वास्थ्य केंद्रों पर दिए जा रहे हैं उनका रजिस्ट्रेशन टैक्सी एक्ट में है अथवा नहीं। जांच के बाद जब मामला खुला तो तत्काल आरटीओ में सभी का पंजीकरण कराया गया। इधर, टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवालों को लेकर एडी हेल्थ डॉ. शाही ने फाइल तलब कर जांच-पड़ताल शुरू कर दी। फाइल में तमाम औपचारिकताएं पूरी नहीं हुईं थीं और अभिलेख भी नहीं पाए गए। ऐसे में जांच करना संभव नहीं हो सका। एडी हेल्थ डॉ. सीके शाही ने कहा कि चूंकि पूरी प्रक्रिया आधी-अधूरी है। ऐसे में अभिलेख भी संपूर्ण नहीं है। हां, कमेटी के सदस्यों की फाइल मिली है। इसमें एक सदस्य के हस्ताक्षर भी नहीं हैं। फिलहाल, उसे निरस्त कर दिया गया है। नया टेंडर शीघ्र करा दिया जाएगा।