बीडीसी चुनाव को लेकर तीन माह पहले हुई बेबहना गांव निवासी रामपाल सिंह की हत्या के मुख्य आरोपी लजघटा गांव निवासी राघवेन्द्र प्रताप सिह की सोमवार की सुबह लखनऊ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। एनीमिया से पीड़ित होने के बाद बीते साल दिसंबर की तीन तारीख को उसे पुलिस अभिरक्षा में इलाज के लिए लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था।
पंचायत चुनाव में छह अक्टूबर को सुबह पौने आठ बजे बेबहना गांव निवासी पूर्व प्रधान राम पाल सिंह की जीप से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे जो तथ्य सामने आऐ थे, उसके अनुसार हर्रैया थाना क्षेत्र के लजघटा निवासी राघवेंद्र प्रताप सिंह बिक्रमजोत से प्रमुख पद पर अपनी दावेदारी करना चाहते थे, इसलिए वह बेबहना से अपने किसी समर्थक को उम्मीदवार बनना चाहते थे। बेबहना निवासी पूर्व प्रधान राम पाल सिंह ने अपने गांव की एक महिला को प्रत्याशी बनाया तो दोनों पक्षों के बीच तनातनी बढ़ गई। छह अक्टूबर की सुबह राघवेन्द्र के साथी बृजराज शुक्ला और रामशंकर पांडेय महिला प्रत्याशी को जीप से समझाने बेबहना गांव गए तो रामपाल के सर्मथकों से बहस हो गई। महिला प्रत्याशी के अपहरण करने कोशिश करने का आरोप लगाते हुए गांववालों ने दोनों को घेर लिया और मारपीट की। घटना की जानकारी होने पर राघवेंद्र सिंह बंधक बनाए गए राम शंकर को छुड़ाने सर्मथकों के साथ बेबहना गए तो भीड़ ने पथराव कर दिया। इसी बीच मौका पाकर बृजराज और राम शंकर पांडेय जीप के चालक श्याम भवन के साथ भागने लगे। तीनों को भागते देखकर रामपाल सिंह ने जीप के आगे खड़े होकर रोकने की कोशिश की तो आरोपियों ने उन पर गाड़ी चढ़ा दी। गंभीर हालत में घायल रामपाल सिंह को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। जहां उसी दिन दोपहर में रामपाल ने दम तोड़ दिया। उनके पुत्र संतोष ने राघवेन्द्र प्रताप सिंह को मुख्य आरोपी बनाते हुए बृजराज शुक्ला, राम शंकर पांडेय, श्याम भवन वर्मा, सुरेन्द्र पांडेय और एक अन्य को हत्या का आरोपी बनाया था। आठ अक्टूबर को बृजराज और श्याम भवन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जबकि राघवेंद्र प्रताप सिंह और राम शंकर पांडेय को 23 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस विवेचना में दो अन्य आरापियों की संलिप्तता पुलिस जांच में नहीं पाई गई। जेल जाने के बाद से ही राघवेन्द्र की तबीयत खराब हो गई थी और उसका हीमोग्लोबीन का स्तर छह प्रतिशत होने पर पहली बार नवंबर में लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। जहां डॉक्टरों ने उसे एनीमिया से पीड़ित बताया।
इलाज के बाद कुछ सुधार होने पर पंद्रह दिन बाद उसे जिला जेल भेज दिया गया। मगर एक सप्ताह में ही फिर उसकी हालत बिगड़ने लगी तो न्यायालय के आदेश पर उसे तीन दिसंबर को लखनऊ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उसकी हालत स्थिर बनी हुई थी। रविवार की सुबह से ही राघवेंद्र को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। परिवारवालों के मुताबिक पुलिस अभिरक्षा में होने के चलते उसे किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराने के लिए ले जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। जब राघवेंद्र की हालत नाजुक हो गई तो उसे किसी तरह से परिवारवाले लखनऊ एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां रविवार से ही वह वेंटिलेटर पर था। सोमवार सुबह करीब पांच बजे राघवेन्द्र ने दम तोड़ दिया।