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दूसरे दिन भ्ाी नहीं मिले लापता किसान

Sat, 30 Dec 2017 12:14 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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दुबौलिया थाना क्षेत्र के पारा गाव के निकट घाघरा नदी मे नांव पलटने पर मौके पर एसपी संकल्प शर्मा पहुंचे। - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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हर्रैया/बस्ती। दुबौलिया थाने के पारा गांव के पास बृहस्पतिवार रात घाघरा में नाव डूबने से लापता चारो किसानों का दूसरे दिन भी पता नहीं चला। कड़ाके की ठंड के बीच प्रशासन और तटबंध के आसपास के तैरने में पारंगत ग्रामीण पूरे दिन नदी में डूबकर उनकी टोह लेते रहे। 
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 दिन चढने के साथ ही ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ने लगा। असहाय दिख रहे प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा बढ़ते देख मौके पर मौजूद कर्मचारी अधिकारी सहम गए। इसी बीच एसडीएम हर्रैया दिनेश कुमार पहुंचे। करीब 11 बजे एसपी संकल्प शर्मा व प्रभारी क्षेत्राधिकार कलवारी भी पहुंच गए। तब डोंगी नाव पर सवार होकर कांटा डाल-डालकर तलाशी तेज हुई। 

 इस बीच लापता बीहड़,छोटे लाल निवासी पारा व पिपरी के मायाराम व सुरजीत के परिवार के लोग उनके सकुशल निकलने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते रहे। भीषण ठंड में सबके जाने के बाद भी वे तट से हटने का नाम नहीं ले रहे थे।
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 दुबौलिया थाने के पारा गांव के पास बृहस्पतिवार देर रात की घटना बृहस्पतिवार को दुबौलिया क्षेत्र के पारा सहित कई गांव के 21 किसान घाघरा नदी के टापू के बिन चिरागी गांव देवरा गंगबरार में अपने-अपने गेहूं की सिंचाई करके देर शाम करीब साढ़े सात बजे नाव से लौट रहे थे।

इस पार नदी के किनारे पहुंचने से पहले नाव पानी में गिरे पेड़ से टकरा कर पलट गई। किसानों की चीख पुकार सुनकर वहीं पर मछली पकड़ रहे अंबेडकरनगर जनपद के मछुआरों ने 21 लोगों को बाहर निकाल लिया। लेकिन पिपरी निवासी 48 वर्षीय छोटे लाल, 18 वर्षीय सुरजू और पारा निवासी 52 वर्षीय मायाराम व 20 वर्षीय बीहड लापता हो गए। 

भगवान बन पहुंचे मछुआरे 
 पिपरी व पारा के 21 किसानों के लिए अंबेडकरनगर के तीन मछुआरे भगवान का अवतार जैसे साबित हुए। नाव में पारा के ग्राम प्रधान मुकेश सिंह व पूर्व प्रधान इन्द्रलाल के अलावा सुग्रीम सिंह, राम नयन, कृष्ण चंद, सत्यदेव,रामानंद, गिरजेश, पुल्लूर , धर्मेन्द्र सिंह ,राघव सिंह, रजवंत , महेश सिंह ,दिनेश, राम वचन के अलावा पिपरी के निवासी जगदीश, मंजीत, राम चरन, डेबा ,गिरजेश, बेचू आदि का कहना है कि कुछ देर के लिए लगा जैसे जिंदगी का आखिरी वक्त आ गया हो। लेकिन नाव लेकर मछुआरे 'भगवान' बनकर पहुंचे।
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