दशहरा के दिन ज्योति यात्रा के समय से गायब सुमित चौधरी की हत्या उसकी प्रेमिका अनुराधा चौधरी के पिता बलराम चौधरी ने अपने दो भतीजों के साथ मिलकर कर दी। उसी रात सुमित को आपत्तिजनक हालत में देखकर पिता आपा खो बैठा था। दो अक्टूबर को कार में बैठाकर अयोध्या की तरफ ले जाते समय चलती कार में सुमित का गला घोंटकर मार डाला और लाश सरयू नदी में फेंक कर लौट आए। इसके दूसरे दिन यानी तीन अक्टूबर को बेटी के गायब होने की पुलिस को सूचना दी। बलराम ने पुलिस को गुमराह करने के लिए काफी कोशिश की लेकिन चालाकी काम नहीं आई। पुलिस ने लड़की के पिता, चचेरे भाई, नौकर और कार चालक को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, पुलिस के हाथ दोनों की मृत्यु की पुष्टि होने का कोई साक्ष्य नहीं मिला।
शुक्रवार को कोतवाली में घटना का वर्कआउट करते हुए एएसपी नरेंद्र कुमार सिंह ने प्रेसवार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। साथ ही ऑनर किलिंग के पांचों अभियुक्तों को प्रस्तुत किया। उन सबने कबूल किया कि परिवार की इज्जत मिट्टी में मिलाने की वजह से उन सबसे यह गुनाह हो गया।
एएसपी के अनुसार दशहरा मेला देखने के बाद बलराम चौधरी और उनकी पत्नी जब घर पहुंचे तो पूरे घर की लाइट बंद मिली। किसी अनहोनी की आशंका पर वे अंदर जाने से पहले अपने भतीजे प्रेम उर्फ मोनी और अजय उर्फ पताली को बुलाए। उसी समय घरेलू नौकर गोलू भी पहुंच गया। इन सबके एकत्र होने के बाद जब पीछे के रास्ते घर के अंदर गए तो सुमित और अनुराधा को आपत्तिजनक हालत में देखकर आग बबूला हो गए। गिरफ्तार अभियुक्तों ने कबूल किया कि दोनों को अलग-अलग कमरे में बंद कर दिया।
एएसपी का कहना है कि इन लोगों ने पताली और नौकर गोलू को बलराम की तबीयत खराब होने को कहकर खोराखार निवासी धर्मेंद्र चौधरी की कार मांगकर लाने को भेजा। दो अक्टूबर को उसी कार से यह लोग सुमित को बांधकर अयोध्या की तरफ ले जाने लगे। रास्ते में हत्या करके लाश सरयू में फेंक दिए।
इधर, अनुराधा को अपने रिश्तेदार मीरा के यहां इलाहाबाद भेज दिया। वहां इन लोगों ने काफी समझाने की कोशिश की। वे चाहते थे कि लड़की पूरे मामले को भूल जाए। लेकिन वह नहीं मानी। तब बलराम ने कार लेकर पताली और प्रवीण को ट्रक चालक कोईल उर्फ अभिमन्यु को यह कहकर इलाहाबाद भेजा कि लड़की को मारकर फेंक दें वरना वह पुलिस को सारा राज उगल देगी। छह सितंबर को ये लोग उसे कार में बैठाकर सोनपुर पुल पर ले गए। वहां अंतिम बार समझाने लगे लेकिन तब भी वह नहीं मानी तो कीड़े मारने की दवा पिलाकर सोन नदी में फेंक दिया।
एएसपी का कहना है कि इन सबकी अजीब हरकतों से शक हुआ। बाद में जब नौकर गोलू और कुछ अन्य लोग पकड़ में आए तो सारी कहानी सामने आ गई। एएसपी ने वर्क आउट करने वाले कोतवाल विजयेंद्र सिंह, सीआईयू (सर्विलांस इंवेस्टीगेशन यूनिट) सर्वेश राय के अलावा आनंद यादव, विनोद कुमार यादव, अभिमन्यु सिंह, मनोज राय, आदित्य पांडेय, अरविंद यादव, सदानंद यादव, अरुणेश के अलावा अशोक कुमार सिंह, हरेंद्र यादव, अवधेश वर्मा, राहुल सिंह शामिल रहे। इन्हें पांच हजार रुपये पुरस्कार देने को कहा गया है।
यह है घटनाक्रम
वाल्टरगंज क्षेत्र के श्रीपालपुर के मूल निवासी और यंग बार के सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता नेबूलाल चौधरी के पुत्र राजेश चौधरी आवास विकास कालोनी में परिवार सहित रहते हैं। 30 सितंबर को राजेश का 17 वर्षीय पुत्र सुमित दशहरे के दिन शहर में मेला देखने गया। देर रात तक लौटकर नहीं आया तो परिवार के लोग ढूंढने लगे। मोबाइल भी बंद होने से सब परेशान हो गए। पुलिस को तहरीर दी गई। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू ही की थी कि तीन अक्टूबर को उसी मोहल्ले के बलराम चौधरी ने अपनी पुत्री अनुराधा के गुम होने की तहरीर दी।