बस्ती। एडीजे तृतीय रमाशंकर सिंह ने गैर इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी
करार देते हुए पिता पुत्र को सात सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई
है। साथ ही प्रत्येक पर ग्यारह ग्यारह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। इसे
अदा न करने पर सात माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
अभियोजन
के अनुसार नगर थाने के अठदमा गांव की वादी मुकदमा सुमन पुत्री रामजतन ने
स्थानीय थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई कि 24 मई 2013 को उसके गांव के
रामउग्रह के घर पर किसी ने ढेला फेंक दिया। शक के आधार पर रामउग्रह व उनके
परिवार की लक्ष्मी व ऊषा पांच बजे शाम उनके दरवाजे पर गाली व धमकी देने
लगे।
मना करने पर चले गए। रात नौ बजे वादिनी के पिता रामजतन गांव
के रामकुमार के घर शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे कि उनके दरवाजे के
सामने रास्ते पर जान से मारने की नीयत से रामउग्रह ने कुल्हाड़ी से, गौतम
ने लोहे की राड व लक्ष्मी व ऊषा ने डंडे से सिर पर मारकर घायल कर दिया।
जिससे उसके पिता बेहोश होकर गिर पडे। इलाज के दौरान उसके पिता की 26 मई को
मौत हो गई।
मुकदमा दर्ज होकर आरोप पत्र रामउग्रह, उनकी पत्नी
लक्ष्मी, लड़के गौतम के विरुद्घ आरोप पत्र दाखिल हुआ। अभियोजन की ओर से
वादिनी सहित तेरह गवाहों का बयान दर्ज हुआ। पैरवी सहायक शासकीय अधिवक्ता
फौजदारी राघवेश प्रसाद पांडेय ने किया। गवाहों के बयान और सबूतों के आधार
पर जज ने गैर इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी मानते हुए रामउग्रह और उसके
पुत्र गौतम को सात सात के सश्रम कारावास व अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
वहीं लक्ष्मी को दोषमुक्त कर दिया।