बस्ती। अपर सत्र न्यायाधीश पंचम अब्दुल कयूम की अदालत ने हत्या के जुर्म में दोषी करार देते हुए पूर्व ब्लॉक प्रमुख विक्रमजोत सुनील सिंह सहित दो को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर दस-दस हजार रुपये अर्थदंड भी कोर्ट ने लगाया है। इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों को न्यायालय ने दोषमुक्त करार दिया।
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी वीबी मिश्रा ने कोर्ट में घटना का विवरण रखा। बताया कि छावनी थाना क्षेत्र के संतोष कुमार सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि 23 दिसंबर 2002 को वादी उसके भाई विक्रमजोत के निकट ग्राम बंजरिया गोर्साइं गन्ना तौल केंद्र पर मौजूद थे। उसके बड़े भाई अवधेश सिंह विक्रमजोत से बाइक से वहां पहुंच गए और तौल कराने लगे। उसी दौरान करीब साढ़े चार बजे शाम जीप से कुछ लोग आकर सड़क पर रुके। जीप से ब्लॉक प्रमुख विक्रमजोत सुनील सिंह ग्राम बेमहरी थाना दुबौलिया व उनके साथी आशीष सिंह निवासी खजुरी मवई थाना छपिया गोंडा अपने-अपने हाथ में रायफल लेकर नीचे उतरे और गन्ना कांटे पर आते ही अवधेश सिंह पर जान से मारने की नीयत से फायर किए। सुुनील सिंह ने ललकारा और ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जान बचाने के लिए अवधेश सिंह गन्ने के खेत की ओर भागे लेकिन दोनों ने उन्हें जान से मार दिया। जीप में बैठे अन्य समर्थक दहशत फैलाते हुए अमारी बाजार की ओर भाग गए। रिपोर्ट के आधार पर हत्या, जान से मारने की धमकी का मुकदमा दर्ज हुआ। विवेचना के दौरान तेज बहादुर सिंह, लाल बहादुर सिंह, झिन्नू उर्फ भूपेंद्र सिंह, जगन्नाथ सिंह व शैलेष सिंह का नाम प्रकाश में आया। पुलिस ने सभी को हत्या व गैंगस्टर में शामिल करते हुए आरोप पत्र दाचिखल किया। अभियोजन की ओर से वादी सहित नौ गवाहों के बयान हुए। बचाव पक्ष से भी पांच गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इस मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने राजनीतिक द्वेष में फंसाने की दलील दी। सभी पक्षों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने सुनील व आशीष को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।