बस्ती। खून के काले धंधे के मामले में जिम्मेदार चुप हैं। तीन दिनों से गुपचुप ढंग से चल रही कवायद की किसी को भनक नहीं लग सकी। सोमवार को मुकदमा दर्ज होते ही सोशल मीडिया में खबर आते ही पुलिस व स्वास्थ्य महकमा सकते में आ गया।
रक्त का सौदा करते शख्स के पकड़े जाने के बावजूद पुलिस का मामले को दबाना तमाम सवालों को जन्म दे रहा है। मंगलवार को जिला अस्पताल, ओपेक अस्पताल कैली, जिला महिला चिकित्सालय से लेकर तमाम निजी नर्सिंग होम में मरीज, पैरामेडिकल स्टाफ और तीमारदारों में इसी की चर्चा होती रही। पहचान उजागर न करने की शर्त पर एक वरिष्ठ शल्य चिकित्सक ने बताया कि दलालों के माध्यम से ही खून की जरूरत पूरी हो पाती है, क्योंकि रक्त की मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है। अचानक जरूरत पड़ने पर कोई भी इंसान रकम और वैध-अवैध का विचार किए मुंहमांगी रकम देने को तत्पर रहते हैं। धंधेबाज इसी का फायदा उठाकर अमानवीय ढंग से धन इकट्ठा करने में जुटे हैं।
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सीएमओ बोले, जांच कराएंगे
स्वास्थ्य महकमे की चुप्पी पर डीएम डॉ. राजशेखर ने संज्ञान लेते हुए जांच का निर्देश दिया तब सीएमओ डा. जेएल कनौजिया भी हरकत में आए। शहर में तीन ब्लड बैंकों को लाइसेंस होने की जानकारी देते हुए सीएमओ ने कहा कि किस आधार पर महरीखांवा में कथित व्यक्ति रक्तदान करा रहा था इसकी जांच कराई जाएगी।
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रिमांड की जरूरत नहीं: विवेचक
अवैध तौर पर खून निकालने के प्रकरण में जेल भेजे गए प्रभाकर और आकाश का रिमांड लेने के बारे में विवेचक सर्वेश राय ने कहा कि इसकी फिलहाल कोई आवश्यकता नहीं है। विवेचना के दौरान कोई तथ्य आएगा तो इस संबंध में उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।