पोखरनी के पतिराम को लकवा की बीमारी ने उतना लाचार नहीं किया, जितनी औलाद ने। कहने को तीन बेटे हैं लेकिन सबने ठुकरा दिया। मछली के शौकीन रहे बाप को मंझले बेटे ने उसका निवाला क्या खिला दिया, उसकी लखनऊ से साथ आई पत्नी ने हंगामा खड़ा कर दिया। उसी बीच रहस्यमय तरीके से उर्मिला कमरे में लटकी पाई गई।
शनिवार दिन में करीब नौ बजे घटना की सूचना पाकर जब पुलिस पहुंची तो पति परशुराम और अन्य लोग गले में फंसी रस्सी काट रहे थे। प्रभारी निरीक्षक डीके मिश्र का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या ऐसा नहीं लगा कि महिला ने खुदकुशी की होगी। घर के बाहर चारपाई पर पड़े पतिराम ने बताया कि उनके तीन बेटों में सब अलग-अलग परिवार लेकर रहते हैं। वह पति-पत्नी अलग रहकर किसी तरह दिन गुजार रहे हैं। जर्जर चारपाई के किनारे बैठी परशुराम की मां का कहना है कि उर्मिला और तीन बच्चों को लेकर परशुराम लखनऊ में रहता है। गोमती नगर होसड़िया चौराहे के पास रहकर बिल्डिंग की शटरिंग का ठेका लेता है। परिवार सहित कुछ दिन पहले ही वह घर आया। शुक्रवार शाम को मछली लाया था। चूंकि उसके पिता पतिराम पहले से ही मछली खाने के शौकीन थे। यही सोच कर उसने पिता से जिद करके मछली खिलाया। उर्मिला को जैसे ही पता चला तो हंगामा करने लगी।
जिंदा रहने के शक में काटा फंदा
नगर बाजार। आत्महत्या से परे दिख रही इस घटना में पति सहित परिवार के लोग घिरते जा रहे हैं। उम्मीद है कि पोस्टमार्टम में इसका खुलासा होगा। घर पर मौजूद पिता पतिराम और मां को कुछ नहीं सूझ रहा। उसने बताया कि उर्मिला का सबसे छोटा बेटा दो वर्षीय आयुष कमरे के बाहर मां के लिए रोने लगा। पति व अन्य लोगों को शक हुआ तो अंदर जाने लगा लेकिन दरवाजा अंदर से बंद पाया। बुलाने पर भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो पति दरवाजा तोड़कर अंदर घुसा। अंदर उर्मिला पंखे के बगल में आड़ा-तिरछा रखे पुराने नल के पाइप में साड़ी का फंदा बांधकर लटके देखा। पति का कहना है कि उसे शक था कि यह जिंदा है। इसीलिए फंदा काटकर उतार लिया। उर्मिला की मौत की सूचना पाकर उसके पिता रामवृक्ष और कलावती सन्न रह गए। परशुराम की शादी कलवारी थाना क्षेत्र के बभनियाव निवासी रामवृक्ष की बेटी उर्मिला से दस वर्ष पहले हुई। उसके तीन बेटे 10 वर्षीय दीपांशु, पांच वर्षीय प्रांशु और दो वर्ष के आयुष हैं। पतिराम के सबसे बड़ा बेटा राम उदार मुंबई रहता है। जबकि सबसे छोटा राम सजीवन गांव में मजदूरी करके परिवार चलाता है।