नकली एमआरपी वाले पटाखों से पटा बाजार
जीएसटी के हेरफेर में नकली एमआरपी
28 की जगह इस बार 18 प्रतिशत जीएसटी
वीरेंद्र पांडेय
बस्ती। पटाखों के दाम में 10 फीसदी जीएसटी घटाने के साइड इफेक्ट ने चौगुना मुनाफा कमाने की योजना फुस्स कर दी है। अंधाधुंध दाम वसूलने का चस्का ले चुके थोक और फुटकर व्यवसायी निराश है। वहीं, नकली पैकेट पर फर्जी एमआरपी के पटाखों की बड़ी खेप बाजार में है। ताकि जीएसटी के नए विधान को चकमा देकर फिर से ग्राहकों की जेब काट सकें।
बम के इफेक्ट से पटाखों की आधी हुई कीमत नक्कालों को रास नहीं आ रही है। अबकी बार पैकेट पर दर्ज एमआरपी के आधार पर ग्राहक को पटाखा बेचना है, जिसके कारण दुकानदार मनमानी कीमत नहीं वसूल पा रहा। टैक्स की इस विधा ने पटाखा उद्योग को ऐसा जकड़ा कि जमाखोरों की बोलती बंद है।
इस संबंध में डीएम डॉ राजशेखर के अनुसार जीएसटी और एमआरपी पर नियंत्रण रखने के लिए वाणिज्य कर, बाट-माप विभाग, अग्निशमन विभाग की टीमें बनाई गई हें। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के साथ ही पर्यावरण एवं स्वास्थ्य विभाग के नियमों-उपनियमों के मुताबिक मजिस्ट्रियल कमेटी निगरानी कर रही है। एसडीएम सदर के नेतृत्व में फायर व पुलिस विभाग के अधिकारियों के साथ ही संबंधित थाने के एसएचओ को जिम्मा सौंपा गया है।
पट चुका नकली प्रिंट वाला माल
पटाखा व्यवसाय से जुड़े शैलेंद्र बताते हैै कि इस प्रणाली को धता बताकर नकली पैकिंग का माल मार्केट में डाल दिया है। इस खेप में आई आतिशबाजी के समान की एमआरपी मुख्य एमआरपी से दो गुनी है। फुटकर बाजार में पटाखों पर लिखे रेट में मनमाना दाम चस्पा करने की संभावना बढ़ गई है।
पॉलिसी से कम करनी पड़ी एमआरपी
वाणिज्य कर के जानकार व बैंकर राघवेंद्र प्रताप बताते हैं कि जीएसटी लागू होने के लिए अब उसके पैकेट पर जितनी एमआरपी लिखी होगी, उसी अनुसार मूल्य देना होगा। चूंकि निर्माता स्तर पर एमआरपी के हिसाब से टैक्स पहले ही अदा किया गया है। इसलिए निर्माताओं को मजबूरन एमआरपी कम करना पड़ा है।
पैकेट पर प्रिंट होगी एमआरपी
बैंकिंग व बीमा सेवा क्षेत्र से लंबे समय से जुड़े देवेश पांडेय बताते हैं कि एमआरपी प्रिंट होकर इस बार बाजार के खुदरा दुकानदारों को मिली है। अभी तक होता यह था कि पटाखों के डिब्बे पर जो प्रिंट रेट आता था, वह बहुत ज्यादा होता था। उस प्रिंट रेट पर दुकानदार 40 प्रतिशत की छूट देता था। जीएसटी लागू होने के बाद से पटाखे के डिब्बे पर अंकित मूल्य कम होगा।
उपभोक्ता की बल्ले-बल्ले
कर प्रणाली के जानकार अनुराग बताते हैं कि सीधे ग्राहक को फायदा मिलेगा। अब ग्राहक को दुकानदार बिल दे सकेगा। पहले एक्साइज ड्यूटी 12.5 और वैट 14 फीसदी देना पड़ता था। यानी करीब 26.5 फीसदी टैक्स। इसमें अधिभार आदि जोड़कर 28 प्रतिशत था। इस बार वास्तविक दाम पर सिर्फ 18 फीसदी जीएसटी लागू है।
ऐसे समझें फर्क
पिछले वर्ष पटाखों की एमआरपी लागत के हिसाब से नहीं, बल्कि बिक्री बिल के आधार पर जीएसटी लगता था। पांच सौ एमआरपी लिखे बॉक्स पर 30 फीसदी यानी 150 रुपये छूट देने के बाद दुकानदार 350 रुपये में बेचता था। इससे दुकानदार को 222 रुपये का मुनाफा लेकर खुश था तो ग्राहक 30 फीसदी की छूट से मगन हो जाता। इस बार निर्माता कंपनी ही 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़कर एमआरपी प्रिंट हो रहा है। अब असल कीमत तय मुनाफा एमआरपी में प्रिंट है। पांच सौ रुपये का पटाखा थोक दुकानदार को सौ से सवा सौ में मिल रहा है। उस पर एमआरपी 250 रुपये प्रिंट है। बीच के 125 रुपये में ट्रांस्पोर्टेशन फुटकर काउंटर खर्च आदि जुड़ा है।
निर्धारित स्थानों पर ही लगें पटाखों की दुकानें: डीएम
डीएम ने तहसील सभागार में की बैठक, दी हिदायत
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। दीपावली में आतिशबाजी भंडारण और दुकानों को लेकर डीएम डॉ. राजशेखर ने अफसरों के साथ बैठक की। भंडारण और विक्रय स्थान को लेकर दिशा-निर्देश दिए।
तहसील सभागार में सोमवार को हुई बैठक में डीएम ने कहा कि आतिशबाजी के भंडारण व विक्रय स्थान पर अपेक्षित सावधानियों के प्रति कड़ाई से पालन कराया जाना है। कहा कि पटाखों की सभी दुकानें निर्धारित स्थान पर ही लगाई जाएं। संबंधित स्थान पर एंबुलेंस व फायर ब्रिगेड की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि विस्फोटक अधिनियम 2008 के नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए। विस्फोटक सामग्री के विक्रय के समय यह सुनिश्चित किया जाए कि 18 वर्ष से कम के बच्चों को वयस्क व्यक्ति की उपस्थिति में ही पटाखे आदि आतिशबाजी सामग्री दी जाए। आतिशबाजी आइटम को खोलकर किसी डिस्प्ले विन्डो आदि पर प्रदर्शित न किया जाए। कहा कि किसी भी दशा में निर्धारित स्थान के बजाय पटाखों की दुकान अन्यत्र कहीं न लगाई जाए। इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी रमेश चन्द्र, ज्वाइंट मजिस्टेट अमन दीप डुली, अपर पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार सहित जिला एंव तहसील स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।