खून का काला कारोबार
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दो भुक्तभोगियों का कलमबंद बयान दर्ज
प्वाइंटर
- अदालत में प्रदीप सहित दो पीड़ितों का हुआ बयान
- घरसोहिया में तीसरे भुक्तभोगी की हालत बिगड़ी
- खून का अवैध कारोबार करने के प्रकरण में कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
बस्ती। खून के काला कारोबार के शिकार पुरानी बस्ती संजय कॉलोनी निवासी विक्की (31) की हालत बिगड़ती जा रही है। वहीं मुकदमा दर्ज कराने वाले प्रदीप और उसके पड़ोसी सुभाष का शुक्रवार को न्यायालय में कलमबंद बयान कराया गया। दोनों ने अदालत को पूरा घटनाक्रम बताया कि किस तरह वे लोग खून बेचने वाले धंधेबाजों के चंगुल में फंसे।
मामले के विवेचक एसओ पुरानी बस्ती सर्वेश राय ने शुक्रवार को मौके का तीसरी बार मुआयना किया। घटनास्थल और पीड़ितों के घर पहुंचे। आसपास के लोगों से भी पुलिस ने गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। हालांकि मेडिकल कराने को शेष बचे पांचवें भुक्तभोगी का शुक्रवार को भी मेडिकल नहीं कराया जा सका। इन सबके बीच पुलिस अभी तक गिरोह का पर्दाफाश करने में नाकाम रही है। बहरहाल, गैर जिले के एक अस्पताल के अलावा शहर के भी कई अस्पतालों की सूची पुलिस ने तैयार कर ली है, जिन पर शंका है। मगर उन्हें पुलिस सार्वजनिक करने से बच रही है। सूत्रों के मुताबिक कोशिश है कि विवेचना के दौरान हॉस्पिटल और संचालक का नाम मुकदमे में शामिल करके जब चार्जशीट न्यायालय भेजी जाए, तभी नाम सार्वजनिक किया जाए।
बता दें कि पुरानी बस्ती थाने के घरसोहिया संजय कालोनी के रहने वाले प्रदीप ने कोतवाली थानाक्षेत्र के महरीखावां निवासी कथित डॉ. प्रभाकर व उसके सहयोगी पर रक्तदान का झांसा देकर खून निकालने का आरोप लगाया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। मगर, खून निकालकर कहां भेजा जाता था, इसकी तस्दीक पुलिस अब तक नहीं कर सकी है। इस मामले में डीएम के निर्देश पर मजिस्ट्रियल जांच भी चल रही है।
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लचर विवेचना में बेदम हुआ केस
बस्ती। सनसनीखेज प्रकरण में नामजद मुकदमा दर्ज होने और दो मुलजिम गिरफ्तार करने के बावजूद पुलिस के हाथ सुबूत के नाम पर खाली हैं। अब तक की तफ्तीश सिर्फ बयानबाजी पर ही बढ़ रही है। यहां तक कि आरोपी के ठिकानों से भी पुलिस कोई साक्ष्य हासिल नहीं कर पाई, जिससे अदालत में मुकदमा टिक सके। सूत्रों का कहना है कि इसकी विवेचना की शुरुआत में ही सुबूतों से छेड़छाड़ की गई।