धुएं या तेज आवाज से कोई समस्या हो तो तत्काल चिकित्सक से लें परामर्श
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पटाखों से ध्वनि, वायु प्रदूषण बढ़ता है। इसकी तेज आवाज हृदय रोग, अस्थमा, बीपी (ब्लड प्रेशर) के मरीजों के साथ ही छोटे बच्चों को नुकसान पहुंचा सकती है। अस्पताल के आसपास पटाखों का प्रयोग न करें। ‘अमर उजाला’ के अभियान ‘एक युद्ध पटाखों के विरुद्ध’ में चिकित्सकों ने लोगों से पटाखे न फोड़ने की अपील की है।
चिकित्सक डॉ. विजय तिवारी ने बताया कि बीमार लोगों को पटाखों से दूर ही रहना चाहिए। पटाखों से निकलने वाले धुएं और तेज आवाज कभी कभी मरीजों को बड़ी परेशानी में डाल देता है। हृदय रोग के मरीजों को इससे परहेज करना चाहिए। नवजात शिशुओं पर इसका बुरा असर पड़ता है। धुएं के कारण आंखों में जलन भी होने लगती जिससे नेत्र रोग की समस्या उत्पन होने लगती है। यदि धुएं या तेज आवाज से कोई समस्या हो तो तत्काल चिकित्सक से परामर्श लें। सभी को पटाखों के प्रयोग से बचना चाहिए। इससे पर्यावरण ही नहीं सेहत भी प्रभावित होती है।
फिजीशियन चिकित्सक डॉ .विवेक गौरव सचान ने कहा कि आज कल के पटाखे ज्यादा शोर और ज्यादा धुएं वाले होते हैं। इस कारण हार्ट, अस्थमा, ब्लड प्रेशर वाले मरीजों को तो पटाखों से पूर्ण रूप से परहेज करते हुए अपने आप को इनसे दूर रखना चाहिए। ज्यादा धुएं से सांस लेने में दिक्कत होने के कारण बैचेनी होने लगती है। रक्तचाप बढ़ने लगता है जिसके कारण दिल का दौरा भी पड़ सकता है जो जानलेवा साबित हो सकता है।
धुएं से होती है दिक्कत, सादगी से मनाती हूं दीपावली
जिला अस्पताल में भर्ती अस्थमा की मरीज रामवती ने बताया कि उनको पटाखों से निकलने वाले धुएं से सांस लेने में दिक्कत होने के कारण वह दीपावली पर्व को सादगी से मनाती हैं। उन्होंने कहा कि लोग पटाखों की बजाय पर्यावरण के लिए एक कदम चलें तो तमाम बीमारियां खुद-ब-खुद समाप्त हो जाएंगी। जिला अस्पताल में भर्ती हृदय रोग के मरीज अरविंद ने बताया कि उनको तेज आवाज से बहुत ही डर लगता है। जब से यह बीमारी हुई है तब से वह उन जगहों पर जाने से परहेज करते हैं जहां पर तेज आवाज में कुछ भी हो रहा हो। दीपावली में तेज आवाज पटाखों के चलते वे इस कदर भयभीत हो जाते हैं कि घर से ही नहीं निकलते।