कागजों में शत प्रतिशत जांच का दावा, आठ हजार नमूने लंबित
- मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने प्रशासन के डाटा को गलत करार दिया
- हर दिन जांच के लिए औसतन भेजा जा रहा 25 सौ नमूना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। कोरोना सैंपल की लंबित जांच पर सवाल खड़े होने लगे हैं। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज के लैब में हर दिन करीब तीन हजार जांच संभव है। इसके बावजूद प्रशासन के रिकार्ड में हर दिन कोरोना के नमूनों की जांच लंबित दर्ज की जा रही है। हालांकि कागजों में शत प्रतिशत जांच का दावा किया जा रहा है।
जबकि सप्ताह भर का ग्राफ देखा जाए तो औसतन आठ हजार जांच लंबित है। इस स्थिति पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि प्रशासनिक डाटा पूरी तरह गलत है। कोई नमूना लंबित नहीं है। एक दिन पहले कुछ तकनीकी कारणों से अस्पताल प्रशासन ने नमूना नहीं भेजा था, वही नमूना लंबित हो सकता है।
जिले में कोरोना जांच के लिए बायो सेफ्टिक लैब स्थापित किया गया है। इस लैब में पहले तो जांच की क्षमता कम थी, मगर पिछले तीन माह से इसकी क्षमता बढ़ा दी गई है। जिससे नमूनों के जांच की संख्या बढ़ गई। जांच की व्यवस्था के क्रम में जिला अस्पताल में स्थापित कंट्रोल रूम जिले भर के नमूनों को एकत्रित कर हर दिन सुबह बीएसएल भेजता है और नमूनों को उसी दिन जांच कर परिणाम बता दिया जाता है। यह क्रम लगातार जारी है। लंबे समय से यहां नमूनों के लंबित रहने का सिलसिला जारी है। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि हर दिन करीब ढाई हजार नमूने जांच के लिए जाते हैं, मगर परिणाम शत प्रतिशत नहीं मिलता। ऐसे में धीरे-धीरे लंबित नमूनों की संख्या बढ़ गई है।
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प्रशासन की रिपोर्ट अब भी जांच लंबित
एक सप्ताह की लंबित रिपोर्ट पर नजर डालें, तो पहली जुलाई को जिला प्रशासन की ओर से जारी रिपोर्ट में कोरोना के जिले भर के आंकड़ों में लंबित नमूनों की संख्या 8,779 थी, तो दो जुलाई को यह 9,201 पर पहुंच गई। तीन जुलाई को जो ग्राफ प्रशासन ने जारी किया उसमें लंबित नमूनों की सूची 9,175 थी। चार जुलाई को लंबित सूची में 9,455 नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार था, जबकि पांच जुलाई को यह संख्या 9,160 हो गई। छह जुलाई को लंबित रिपोर्ट की संख्या 8,801, तो सात जुलाई को 10,626 हो गई। वहीं, आठ जुलाई को 7,890 प्रतीक्षारत नमूनों की सूची रही।
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कोई नमूना लंबित नहीं
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि कोरोना जांच का कोई नमूना लंबित नहीं है। आठ जुलाई को तकनीकी कारणों से नमूना नहीं मिल सका था, ऐसे में उसे प्रतीक्षारत माना जा सकता है। हर दिन औसतन दो हजार से 25 सौ नमूनों की जांच मेडिकल कॉलेज में हो रही है।