- सहकारी बैंक के 19 शाखाओं के सापेक्ष महज 13 कर्मचारियों की तैनाती
- सप्ताह में एक से दो बार खुल रही अधिकांश शाखाएं, ग्राहकों की भी कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बदइंतजामी के चलते सहकारिता क्षेत्र उबर नहीं पा रहा है। सहकारिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से संचालित सहकारी बैंक शाखाओं की हालत बिगड़ गई है। जिला सहकारी बैंक प्राइवेट लिमिटेड के अधीन बस्ती और संतकबीरनगर में 19 शाखाएं हैं। जबकि आधा दर्जन शाखाएं एक दशक में बंद हो चुकी हैं। इस बार भी कुछ शाखाओं को बंद करने की नौबत आई थी लेकिन, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ तिवारी की सक्रियता से इन बैंक शाखाओं का अस्तित्व बच गया।
बैंक शाखाओं के संचालन के लिए धन की उपलब्धता के साथ कर्मचारियों की भी आवश्यकता है। एक मैनेजर, एक कैशियर, एक लिपिक और एक चतुर्थ श्रेणी मिलाकर कम से कम चार कर्मचारियों की जरूरत प्रत्येक शाखा पर है। जिला सहकारी बैंक मिलाकर सभी 19 शाखाओं के सापेक्ष कुल 13 कर्मचारी हैं। इन्हीं के भरोसे शिफ्टवार इन शाखाओं का संचालन हो रहा है। 5 से 6 लोग जिला सहकारी बैंक के संचालन में लगे हैं। जबकि 6 से 7 लोगों को ग्रामीण अंचल की शाखाओं का जिम्मा सौंपा गया है। एक- एक कर्मचारी पर दो से तीन शाखा संचालित करने का जिम्मा है। ऐसे में ग्रामीण अंचल के सहकारी बैंक शाखा को खुलने में दो से तीन दिन लग जा रहे हैं।
सप्ताह में चार से पांच दिन तक यह शाखाएं बंद चल रही हैं। इस वजह से उपभोक्ता भी नहीं बढ़ पा रहे हैं। वर्तमान में 89 हजार उपभोक्ता ही इस बैंक के पास जिले भर में है। इनका लेनदेन भी न के बराबर है।
सहकारी समितियों की भी हालत खराब
जिले के सहकारी समितियों की भी हालत भी खस्ताहाल है। जिले में 126 सहकारी समितियां संचालित हैं। इसमें बमुश्किल 40 समितियां ही संचालित हो पा रही हैं। क्योंकि समिति संचालन के लिए सहकारिता विभाग के पास सचिव ही नहीं है। वर्तमान में सरकारी एवं अवैतनिक मिलाकर 40 सचिव ही कार्यरत है। एक- एक सचिव के ऊपर दो तीन समितियों की जिम्मेदारी है। बैंक शाखा की तर्ज पर सचिव भी बारी-बारी से समिति का संचालन कर रहे हैं। यदि एक समिति पर दो दिन समय दे रहे हैं तो उतने समय तक उनके अधीन अन्य दो समितियों पर ताला लटक रहा है।
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2047 सहकारिता क्षेत्र ही होकर गुजरेगा। इसके लिए राज्य एवं केंद्र सरकार से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। केंद्र एवं राज्य सरकार की मदद से सहकारी बैंकों की आर्थिक स्थिति पहले से मजबूत हुई है। बैंक ढाई करोड़ के फायदे में भी गया है। उपभोक्ता बढ़ाने के लिए समितियों पर किसानों को सदस्यता दिलाई जा रही है। 226 रुपये में सदस्यता लेने वाले किसान बैंक के शेयरधारक बनाए जा रहे हैं। बैंक शाखाओं के संचालन के लिए आरबीआई भर्ती बोर्ड से कर्मचारी नियुक्त करने के मसले पर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है।
-राजेंद्र नाथ तिवारी, अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक, बस्ती।