उ.प्र. राष्ट्रीय स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी संघ की बैठक जिलाध्यक्ष डॉ. वी.के. वर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी के शिविर कार्यालय के परिसर में संपन्न हुई। बैठक में नौ दिन से जारी कार्य बहिष्कार और हड़ताल के स्थितियों की समीक्षा कर रणनीति बनाई गई।
अध्यक्ष डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि रिजवी कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने, जॉब सिक्योरिटी के साथ राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने, सरकारी नियुक्तियों में संविदा कर्मचारियों को वरीयता दिए जाने, आउट सोर्सिंग बंद कर आशा बहुओं को निश्चित मानदेय और राज्य कर्मचारी का दर्जा दिये जाने, निष्कासित संविदा कर्मियों को बहाल किये जाने आदि की मांग को लेकर समूचे प्रदेश में आंदोलन चल रहा है किंतु अभी तक सरकार और शासन स्तर पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। ऐसा लगता ही ही नहीं की सरकार स्वास्थ्य संविदा कर्मचारियों की मांगों और हड़ताल की वजह से लोगों को हो रही परेशानी को लेकर गंभीर है। ऐसे में जब तक उ.प्र. राष्ट्रीय स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश नेतृत्व का निर्णय नहीं आ जाता आंदोलन जारी रहेगा।
बैठक को डा. दिनेश सिंह कुशवाहा, सुनील कुमार, जयंत नाथ तिवारी, अखिलेश त्रिपाठी, डा. संगीता आदि ने संबोधित किया। कहा कि अच्छा हो कि सरकार मांगो पर शीघ्र विचार करे जिससे संविदा चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी अपने दायित्वों का पालन कर सके। इस मौके पर डा. अजय श्रीवास्तव, डा. पी.एन. चौधरी, डा. देवेन्द्र, अनीता देवी, अवधेश मिश्र, स्वाती गुप्ता, शैलजा त्रिपाठी, ममता, आशा वर्मा, अर्चना, शशि, संध्या, रजत, डा. अमित, डा. विकास गौड़, डा. बदरे आलम, डा. अस्मिता सिंह, डा. शिप्रा सिद्दीकी, दीप्ति सिंह, मोहित सिंह, जगजीत कुमार सिंह, राघवेन्द्र मणि त्रिपाठी, डा. ज्योति वर्मा, अभिषेक चौधरी, डा. माधवी सिंह, डा. अजय शुक्ल, डा. शिव प्रसाद सिंह, रामजीत चौरसिया, राघवेन्द्रमणि त्रिपाठी, इब्राहीम खान, मो. शहाबुद्दीन, राम शकल, अश्विनी, सुजीत, पूनम, अमित, प्रमोद शर्मा, शशि सिंह, सुमित सिंह, अश्विनी मिश्र के साथ ही अनेक स्वास्थ्य संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।