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Basti News: गेहूं की फसल को ऑक्सीजन दे रही ठंड, सब्जियों के लिए खतरा

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बस्ती। शीत लहर गेहूं की फसल के लिए ऑक्सीजन का काम करेगी। क्योंकि जितनी कड़ाके की ठंड पड़ेगी, उतना ही गेहूं की अच्छी पैदावार होगी। अरहर, सरसों, मटर, आलू और अन्य सब्जियों की फसल के लिए यह शीत लहर खतरनाक है। इन पर पाला लगने की आशंका है। फफूंदी लग जाएगी। पत्तियां सफेद हो जाएंगी। ऐसे में फसल के बर्बाद होने की आशंका बनी रहेगी।
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जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि फसलों को पाला से बचाने के लिए दवा के साथ-साथ देसी जुगाड़ भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ठंड में फसल को बचाने के लिए किसानों को खेतों के चारों तरफ सूखी पत्तियां, पुआल या लकड़ी डंडिया जलाकर ढक देना चाहिए, ताकि धुआं से खेतों में फैले। इससे चार डिग्री तक तापमान बढ़ जाता और फसल को पाला रोग से बचाता है। इससे शाम के वक्त ताजे पानी से खेतों की सिंचाई करनी चाहिए। फसलों को फफूंदी रोग से बचाव के लिए दवा का छिड़काव करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि कड़ाके की ठंड में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने का खतरा सबसे अधिक रहता है। इस रोग से फसल की पत्तियों में गोल आकार के भूरे धब्बे बन जाते हैं। इससे बचाव के लिए फफूंद नाशक दवा कॉर्वेंडाजिम और मैनकोजेब के मिश्रण का दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। साथ ही, पाले से बचाव के लिए हल्की सिंचाई सबसे प्रभावी तरीका है।
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गेहूं की फसल में खरपतवार की समस्या बड़े पैमाने पर होती है, जो दो प्रकार के होते हैं। चौड़ी पत्ती वाले और संकरी पत्ती वाले। इनसे बचाव के लिए एक एकड़ गेहूं की खेती के लिए 13.5 ग्राम सल्फोसेल्फ्युरान और मेटसेल्फ्यूरान के मिश्रण का छिड़काव करना चाहिए। यदि गेहूं की फसल 25 दिन की हो चुकी है तो उसमें सिंचाई कर देनी चाहिए।
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