अमहट घाट पर तैयार हो रही वेदी, बाजार में बढ़ी गहमागहमी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। भगवान सूर्य की उपासना का महापर्व छठ पूजा मंगलवार पांच नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होगा। बुधवार को खरना, बृहस्पतिवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिन के पर्व का समापन होगा। कुआनो नदी के अमहट घाट और पुरानी बस्ती निर्मली कुंड पर बेदी बनाई जा रही है।
दिवाली व भैयादूज से दो दिन बाद शुरू होने वाले चार दिवसीय छठ पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटने से बाजार में रौनक दिखने लगी है। शहर से लेकर गांवों तक घाटों व पोखरों की साफ-सफाई होने लगी है। शहर के व्यापारी विभिन्न प्रकार के फलों का स्टाक मांगा रहे हैं।
शहर के शास्त्री चौक, कंपनीबाग, फव्वारा तिराहा, कटरा तिराहा, रोडवेज, सरदार भगत सिंह चौक, नेहरू तिराहा, दक्षिण दरवाजा, करुआ बाबा तिराहा, स्टेशन तिराहा समेत आसपास के इलाकों के बाजार छठ पूजा के सामान से सज गए हैं। लोग पूजा के लिए छोटी से छोटी सामग्री जुटाने लगे हैं। छठ पूजा के लिए कोसी, पीतल या बांस का सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, फल सहित अर्चना के लिहाज से हर सामान की खरीदारी करने में लगे हैं। साड़ियों की दुकान पर महिलाओं की भीड़ बढ़ गई है। चूड़ी, बिंदी सहित महिलाओं की साज-सज्जा से संबंधित दुकानों पर लोगों की भीड़ देखी जा सकती है।
अमहट घाट पर बेदी बननी शुरू
- दो दिन पहले से ही अमहट घाट पर जगह आरक्षित करने की कोड़ देखी गई। अपनी बेदी बनाकर लोग उस पर आपने नाम का पोस्टर चिपका रहे हैं, ताकि उनके स्थान पर कोई दूसरा बेदी न बना सके। रविवार को बड़ी संख्या में लोग बेदी बनाते दिखे। घाट पर मिले श्रद्धालु अखिलेश ने बताया कि पहले से जगह न तय कर लें तो पूजा में दिक्कत हो जाती है।
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प्रसाद और फल से सजती है बांस की टोकरी
इस अनुष्ठान के दौरान प्रसाद और फल से पूरी बांस की टोकरी सजाई जाती है। बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, प्रसाद रखने के लिए बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी, कुर्ता-पजामा के अलावा पानी वाला नारियल, पत्तेयुक्त गन्ना, सुथनी और शकरकंद, नाशपाती और बड़ा मीठा नींबू यानी टाब रखते हैं। शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, चावल, लाल सिंदूर, धूप और एक बड़ा दीपक, हल्दी और अदरक का हरा पौधा कैराव, कपूर, कुमकुम, चंदन, मिठाई भी अनिवार्य सामग्री है।
प्रसाद और फल से सजती है बांस की टोकरी इस अनुष्ठान के दौरान प्रसाद और फल से पूरी बांस की टोकरी सजाई जाती है। बांस की दो तीन बड़ी टोकरी, प्रसाद रखने के लिए बांस या पीतल के बने तीन सूप, लोटा, थाली, दूध और जल के लिए ग्लास, नए वस्त्र साड़ी, कुर्ता-पजामा के अलावा पानी वाला नारियल, पत्तेयुक्त गन्ना, सुथनी और शकरकंद, नाशपाती और बड़ा मीठा नींबू यानी टाब रखते हैं। शहद की डिब्बी, पान और साबुत सुपारी, चावल, लाल सिंदूर, धूप और एक बड़ा दीपक, हल्दी और अदरक का हरा पौधा कैराव, कपूर, कुमकुम, चंदन, मिठाई भी अनिवार्य सामग्री है।