तीन गुना ज्यादा बंदियों के बीच संक्रमण रोकने की चुनौती
बस्ती। मंडलीय कारागार में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के पीछे बंदियों की क्षमता से तीन गुना तादाद सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है। 480 बंदियों को रखने की क्षमता वाली जेल में साढ़े 12 सौ बंदी रखे गए हैं। इनमें साढ़े छह सौ बंदी बस्ती जिले के और बाकी संतकबीरनगर जिले के शामिल हैं।
40 बंदियों की बैरक में सौ से ज्यादा बंदी रखना जेल प्रशासन की मजबूरी है। हालांकि जेल प्रशासन ने सभी एहतियाती प्रबंध दुरुस्त रखने का दावा कर रहा है, लेकिन शारीरिक दूरी घटने पर तेजी से बढ़ने वाली बीमारी कैसे रोकी जाए, यह बड़ा सवाल है।
जेल प्रशासन का मानना है कि 14 जनवरी को संतकबीरनगर जिले के दो बंदी पेशी के लिए लाए गए थे। उनकी वापसी के बाद नियमानुसार जब उसकी कोराना जांच कराई गई तो रिपोर्ट पाजिटिव आई। उसके बाद उनके संपर्क में आए 372 बंदियों का टेस्ट कराया गया तो उसमें 19 की रिपोर्ट पाजिटिव मिली। उसके बाद जब जेल प्रशासन ने सभी बंदियों का एंटीजन टेस्ट कराने का फैसला लिया। तब से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है।
जेल अधीक्षक संतलाल यादव का कहना है कि बैरक नंबर 18 को आइसोलेशन वार्ड में तब्दील कर एक डॉक्टर, दो पैरा मेडिकल स्टाफ की तैनाती कर दी गई है। जिला अस्पताल के तीन अन्य डॉक्टरों की देखरेख में संक्रमित बंदियों का इलाज चल रहा है। जेल अधीक्षक का कहना है कि संतकबीरनगर जिले में जेल बदकर तैयार न होने की वजह से वहां के बंदी भी इसी जेल में रखे जाते हैं। इसी लिए लंबे समय से ओवर क्राउडिंग की समस्या है।
कोविड-19 का संक्रमण शुरू होने पर लॉक डाउन के समय जेल में एक साथ पांच सौ से ज्यादा बंदियों के संक्रमित पाए जाने के बाद हड़कंप मच गया था। मगर कुछ महीनों में संक्रमितों की संख्या शून्य हो गई थी। पिछले 10 दिन से जेल में संक्रमितों की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ने लगी। शनिवार को 27, शुक्रवार को 31 बंदी करोना संक्रमित मिले थे।
जेल की ओवर क्राउडिंग यानी क्षमता से ज्यादा बंदियों की संख्या के कारण केवल कोरोना ही नहीं, और भी समस्याएं बार-बार खड़ी हो रही हैं। गर्मी के दिनों में संक्रामक बीमारियों का प्रकोप कैदियों से लेकर जेल स्टाफ तक को तंग करता है। इसके अलावा गर्मी में नहाने, सोने में दिक्कत होती है। शौचालय का इस्तेमाल करने को लेकर कई बार झगड़े व मारपीट तक की नौबत आ चुकी है।