पराली जलने पर 30 कर्मचारियों पर कार्रवाई
बिना रीपर छह मशीनें जब्त, अब तक दर्ज किए गए 87 प्रकरण
- डीएम-एसपी ने प्रेसवार्ता के दौरान प्रस्तुत किया आंकड़ा
बस्ती। फसलों का अवशेष यानी पराली जलाने के संबंध में जिले के 87 किसानों पर प्रशासनिक एवं पुलिस की कार्रवाई की गई। चार अक्टूबर से चार नवंबर के बीच इसे लेकर व्यापक अभियान चलाया गया। जिसमें बिना रीपर वाली छह कंबाइन मशीनें जब्त की गईं। 11 किसानों पर एफआईआर दर्ज कराने के अलावा सवा लाख रुपये जुर्माना लगाया गया। इनमें साढ़े 42 हजार रुपये तत्काल जमा भी कराए गए। दायित्व का ढंग से निर्वहन न करने पर 30 कार्मिकों पर भी कार्रवाई की गई।
डीएम आशुतोष निरंजन एवं एसपी हेमराज मीणा ने संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि यहां वायु प्रदूषण का स्तर वैसे तो काफी नीचे है, लेकिन शासन के निर्देश पर धान की पराली (पुआल) न जलाने को लेकर व्यापक अभियान चलाया गया। जिसका प्रतिफल रहा कि पिछले वर्ष पराली जलाने के चिह्नित किए गए चार सौ मामलों के सापेक्ष सिर्फ 87 प्रकरण ही सामने आए। डीएम ने बताया कि इस बार कृषि मंत्रालय भारत सरकार ने इसरो से टाइअप करके सेटलाइट का चित्र तैयार कराया था। इसलिए इसमें किसी तरह की हीलाहवाली या लापरवाही छिप नहीं सकती। बताया कि 16 अक्टूबर को एडीएम की अध्यक्षता में एएसपी, डीआईओएस, जिला कृषि प्रसार अधिकारी, डीपीआरओ, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी की सदस्यता वाली समिति का गठन किया गया था।
प्रेसवार्ता में मौजूद एडीएम रमेश चंद्र और उप निदेशक कृषि डा. संजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि इस मुद्दे को शीर्ष प्राथमिकता पर रखते हुए प्रत्येक गोष्ठियों-सभाओं में अपील करते रहते हैं कि पराली जलाना कितना नुकसानदेह है। पराली जलाने को लेकर प्रशासन ने तीस कार्मिकों (सरकारी कर्मियों) पर कार्रवाई की गई है। इनमें नौ राजस्व लेखपाल, 14 सहायक विकास अधिकारी (कृषि), तीन उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी के अलावा चार अन्य कर्मचारी शामिल हैं।