बस्ती। जिले के सरकारी चिकित्सालयों में कैंसर जैसे असाध्य रोगों के इलाज की व्यवस्था नहीं बन पाई है। ऐसे मरीजों को लखनऊ, दिल्ली और मुंबई तक भटकना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल से लेकर मेडिकल कॉलेज तक कैंसर रोगियों के इलाज की सुविधा नहीं बन पाई है। इसके अलावा कैंसर जैसे गंभीर रोग को पकड़ने के लिए इन अस्पतालों में एडवांस जांच की व्यवस्था भी नहीं है। संभावित मरीजों की जांच बाहर से कराई जा रही है।
जिला महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय और मेडिकल कॉलेज में एक अनुमान के तौर पर प्रत्येक महीने किसी न किसी बीमारी से ग्रसित औसतन पांच से सात लोग कैंसर रोगी निकल रहे हैं।
ज्यादातर स्तन कैंसर, मुंह में कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर के मरीज पाए जा रहे हैं। जिला महिला चिकित्सालय में तैनात विशेषज्ञ डॉ. आशुतोष शर्मा बताते हैं कि महिलाओं में ज्यादातर स्तन कैंसर की समस्या देखने को मिल रही है। स्तन में अंदर ही अंदर गांठ जैसी समस्या पहले होती है।
शुरूआत में महिलाएं इसे छिपाती है। बाद में इससे जब दर्द बढ़ता है या गांठ की साइज बड़ी होती है तो चिकित्सक के पास पहुंचती है। इस दौरान शिष्ट की बॉयोप्सी जांच आवश्यक होती है। इससे कैंसर का पता चलता है। यदि जांच में कैंसर नहीं निकला तो ऑपरेशन करके शिष्ट निकाला जा सकता है। लेकिन, कैंसर निकलने पर इलाज की प्रक्रिया बढ़ जाती है। इस तरह के मरीजों को अमूमन हायर सेंटर पर भेजा जाता है।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉ. विजय तिवारी बताते हैं कि 60 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में प्रोस्टेट की समस्या पनपती है। इससे बाथरूम होने में कठिनाई होती है। कभी- कभी प्रोस्टेट बढ़ने से बाथरूम के रास्ते ब्लड भी आ जाता है। ऐसे में मरीज चिकित्सक के पास आते हैं। इस तरह के मरीजों में किसी न किसी को कैंसर भी होने की पुष्टि हो रही है। जिससे उन्हें रेफर करना पड़ता है।
मुंह का कैंसर सबसे खतरनाक : मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग के अध्यक्ष एवं उप प्रधानाचार्य डॉ. अनिल कुमार यादव बताते हैं कि मुंह का कैंसर सबसे खतरनाक है। अच्छी तरह से केयर और त्वरित इलाज न होने पर कैंसर का वायरस तेजी के साथ फैलता है। कभी-कभी मरीज को तीसरे या चौथे स्टेज में कैंसर होने का पता चलता है। तब इस बीमारी से लड़ना कठिन हो जाता है।
उन्होंने बताया कि मुंह के कैंसर से बचने के लिए व्यक्ति गुटखा, तंबाकू, सिगरेट से परहेज करना चाहिए। इसके सेवन करने से कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।