बस्ती। गोरखपुर में कैंट-कुसम्ही तीसरी लाइन के नॉन इंटरलाकिंग कार्य के चलते ट्रेनों का आवागमन प्रभावित होने से रेल यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इसके चलते सामान्य दिनों में दो से ढाई हजार रुपये तक लखनऊ का निजी वाहनाें से किराया लगता है, मगर इधर ट्रेन निरस्त होने से किराया दोगुना यानी पांच से छह हजार रुपये हो गया है। स्थिति यह है कि हर दिन लोगों को झेलना पड़ रहा है।
लोगों को अयोध्या, लखनऊ, कानपुर तक की यात्रा के लिए मजबूरन निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। यही नहीं जो लोग बस से जिला मुख्यालय पहुंच जा रहे हैं उन्हें बभनान, गौर, मुंडेरवा आदि के लिए ऑटो या फिर निजी वाहनों का ही सहारा लेना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय से हर दिन 65 ट्रेनों का संचालन होता है। इस रूट पर लखनऊ, कानपुर के अलावा गोंडा, अयोध्या व बभनान, गौर, टिनिच के लिए भी ट्रेन का सफर सुविधाजनक व सस्ता है, मगर पैसेंजर ट्रेन निरस्त होने के कारण बाहर से आने वाले लोग निजी साधनों के सहारे ही गोंडा, बभनान, गौर, टिनिच आदि स्थानों तक पहुंच पा रहे हैं।
रविवार की सुबह स्टेशन के निकट ही लखनऊ के अलावा लोकल रूट पर जाने के लिए निजी वाहन यात्रियों से मोलभाव करते हुए नजर आए। बभनान जाने के लिए यहां सामान्य दिनों में तो 1500 रुपये लगते हैं, मगर रविवार को निजी वाहन वाले 2500 से 3000 मांग रहे थे।
गोंडा के लिए 3000 भाड़ा
शहर के रोडवेज से लेकर बस स्टैंड तक निजी वाहनों को किराए पर देने की व्यवस्था है, मगर इन दिनों निजी वाहनों की पूछ ट्रेन निरस्त होने के कारण अधिक हो गई। ऐसा मौका रोज कहा मिलता है। टैक्सी चालक राजकुमार ने बताया कि यहां अयोध्या के लिए तत्काल टैक्सी मिल जाती है। उसका कारण यह कि उधर से लौटने पर सवारी मिल जाती है, मगर बभनान और गोंडा जाने पर लौटने में दिक्कत होती है, क्योंकि यह ऑफ रूट है।
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पूरे दिन सन्नाटा, शाम को बढ़ जाती है भीड़
गोरखपुर में रीमॉडेलिंग के चलते ट्रेनों की आवाजाही बंद है। ऐसे में दिनभर छिटपुट ट्रेनों की आवाजाही के अलावा पूरा दिन स्टेशन परिसर सन्नाटे में डूबा रहता है। प्लेटफाॅर्म नंबर एक से चार तक छिटपुट यात्रियों की मौजूदगी नजर आती है, मगर दिनभर स्टेशन खाली रहता है। केवल पूछताछ केंद्र पर ही भीड़ दिखती है। लेकिन शाम को यह सन्नाटा टूट जाता है। यहां भारी भीड़ दिखती है। क्योंकि दिल्ली, मुंबई व अन्य महानगराें के लिए ट्रेन आने जाने लगती हैं।