नरखोरिया में आयोजित बौद्ध मेले में उपस्थित भीड़- संवाद
मुंडेरवा। क्षेत्र के जगदीशपुर में मंगलवार को अशोक धम्म विजय दशमी (दीक्षा दिवस) पर बौद्ध धम्म सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि भिक्षु साकेत बोधी (अयोध्या) ने कहा कि बौद्ध धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा है। मुख्य वक्ता एवं नेतृत्वकर्ताओं में सुगंध बौद्ध, महेन्द्र कुमार, सुग्रीव बौद्ध, सुरेश बौद्ध और शंभू प्रसाद ने कहा कि 14 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। ठीक 69 साल पहले, 1956 में डॉ. भीमराव अंबेडकर ने अपने 3,65,000 अनुयायियों के साथ हिंदू धर्म त्यागकर बौद्ध धर्म अपनाया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन भी किया गया। नाटक ने उपस्थित लोगों को प्रेरित किया और बौद्ध धर्म तथा समाज सुधार की दिशा में उनके योगदान को जीवंत रूप में पेश किया। इस अवसर पर सोमई प्रसाद, केपी राठौर, राधेश्याम बौद्ध आदि उपस्थित रहे।
संतों ने दिया जीवन में बुद्ध के आदर्श अपनाने का संदेश
भानपुर। तहसील क्षेत्र के आंबेडकर आलोक बौद्ध विहार में मंगलवार को बौद्ध मतावलंबियों की ओर से आयोजित विशाल धम्मदेशना एवं बौद्ध मेले में कुशीनगर से आए मुख्य अतिथि पूज्य भिक्खू शील प्रकाश ने भगवान बुद्ध के जीवन दर्शन और उनके उपदेशों पर चर्चा की। उन्होंने बुद्ध के आदर्शों और शिक्षाओं को आत्मसात करने और समाज में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया।कार्यक्रम की शुरुआत सपा विधायक राजेंद्र प्रसाद चौधरी ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। नायब तहसीलदार देवरिया सदर गंगाराम ने अध्यक्षता की, जबकि संचालन एडवोकेट बुद्धि प्रकाश ने किया। कार्यक्रम में त्रिशरण, पंचशील एवं धम्म उपदेशों के साथ भजन, गीत और कलाकारों द्वारा आकर्षक झांकियों का आयोजन किया गया।तिलकराम, गौतम, उदयभान, फूलचंद्र गौतम, मिश्रीलाल, श्याम सुंदर आजाद, हरीराम गौतम, रंगीलाल गौतम, हरीश चंद्र गौतम, सालिक राम गौतम, प्रेम कुमार गौतम, सीताराम, सतीश, दुर्बलीराम सहित बड़ी संख्या में बौद्ध समाज के लोग उपस्थित रहे। संतों ने जीवन में नैतिक मूल्यों, अहिंसा और सहिष्णुता के पालन पर जोर दिया। धम्मदेशना में शामिल लोगों ने बताया कि इस कार्यक्रम से उन्हें भगवान बुद्ध के संदेशों और उनके जीवन मूल्यों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में आपसी भाईचारा और मानसिक शांति बढ़ाने में मदद करते हैं। मेले में स्थानीय लोगों ने भाग लिया।
नरखोरिया में आयोजित बौद्ध मेले में उपस्थित भीड़- संवाद