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काली हो गई कुआनों, प्रदूषण बोर्ड बता रहा शुद्ध पानी   

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कुआनो। - फोटो : amar ujala
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बस्ती। जीवनदायिनी नदी कुआनों प्रदूषण से कराह रही है। इसका जल इस कदर दूषित हो गया है कि पशु पक्षियों ने इससे मुंह मोड़ लिया है। कुआनों को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए कई स्वयंसेवी संगठन कार्य भी कर रहे हैं, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है। इधर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें कुआनों का पानी शुद्घ बताया गया है। 
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एक समय था जब कुआनों नदी मनुष्यों के साथ ही पशु पक्षियों के लिए वरदान हुआ करती थी। लोग इसी के जल से अपने खेतों की सिंचाई व खुद की प्यास बुझाते थे। इसकी गोद में न जाने कितने जलीय जीवों ने अपनी आंखें खोली हैं, लेकिन आज इनके जीवन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। रहनुमाओं ने इस नदी के बचाने को आवाज बुलंद की, पर यह आवाज अब नक्कारखाने में तूती जैसी गई है। बदलते परिवेश व नदी में विभिन्न माध्यम से आ रहे दूषित जल से कुआनों नदी अपना स्वरूप बदलती जा रही है। नदी की धारा कहीं खो सी गई है। निर्मल कुआनों में जलकुंभियों ने अपना कब्जा जमा लिया है। रही-सही कसर आस्था के नाम पर पूरी हो जा रही है। आलम यह है कि कुुआनों अपने अस्तित्व को खोती जा रही है और अब इस नदी को किसी भगीरथ का इंतजार है जो इसे प्रदूषण से बचाए।
                                      
इनकी सुनिए                                      
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अभियंता विजय कहते हैं कि हर माह नदी के प्रदूषण की जांच होती है। यह नदी प्राकृतिक रूप से स्वच्छ है। चूंकि बस्ती में लैब नहीं हैं, इस वजह से जांच के लिए कुआनों का पानी उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड लखनऊ को भेजा जाता है। रिपोर्ट के आधार पर यह नदी पूरी तरह से साफ है।                                      
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यह है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट       
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सितंबर 18 की रिपोर्ट के मुताबिक कुआनो नदी के जल में पीएच 7.18 है जो 02-12 तक होना चाहिए। टोटल डिजॉल्वड सॉलिड 112.0 मिली ग्राम पाया गया जिसकी सीमा 5.0 से लेकर 10 हजार मिली ग्राम तक है। कुल कठोरता 136.0 मिलीग्राम मिली, जो 10.0 से लेकर 5 हजार मिलीग्राम तक हो सकती है। इसी तरह क्लोराइड 17.0 मिलीग्राम प्राप्त हुई, जो 3.0 से 5 सौ मिलीग्राम तक हो सकती है। डीओ 4.5 मिलीग्राम मिली, जो 0.2 से 14.0 मिलीग्राम तक हो सकती है। इसी तरह बीओडी 3.0 मिलीग्राम प्राप्त हुआ जो 1.0 से 1 हजार मिलीग्राम तक हो सकती है। सीओडी 40.0 मिला जो 4.0 से एक हजार मिलीग्राम तक हो सकती है।

इस तरह हुआ कुआनों नदी का उद्गम 
कुआनों नदी का उद्गम पहाड़ न होकर कुंआ है, जिससे इसे कूपवाहिनी भी कहते हैं। यह बहराइच जिले के पूर्वी निचले भाग से प्रारंभ होकर गोंडा के बीचोंबीच होकर रसूलपुर में बस्ती मंडल को स्पर्श करती है। यह बस्ती पूर्व, बस्ती पश्चिम, नगर पश्चिम, नगर पूर्व, महुली पूर्व तथा महुली पश्चिम परगना को पृथक भी करती है। गोरखपुर में यह घाघरा में विलीन हो जाती है।                                    


लंबे समय से कुआनो नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की मुहिम में शामिल मनमोहन श्रीवास्तव काजू ने कहा कि रिपोर्ट में भले ही नदी स्वच्छ हो, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। कहा कि नदी के काले पानी को देख कर इसकी स्वच्छता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
कुआनो नदी के प्रदूषण को लेकर तमाम प्रयास कर रहे अजय श्रीवास्तव व राजेश मिश्र ने कहा कि कुआनो की दशा अच्छी नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस नदी का पानी काला हो गया है। इसके पानी की जांच कराए जाने की जरूरत है। महज  प्रदूषण के लिए संघर्ष करने वाले अजय श्रीवास्तव व राजेश मिश्र ने कहा कि नदियां मां का रूप होती हैं, इसे स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी सभी की है, कहा कि कुआनो अभी प्रदूषण मुक्त नहीं हुई है। वह रिपोर्ट कैसे बना दी गई है। यह समझ से परे है।
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