- कानपुर, अयोध्या से आ रही मिलावटी पनीर, सरकारी बसों से उतरी जा रही खेप
- सिंथेटिक पनीर की बढ़ गई खपत, शादी- ब्याह के आयोजन में हो रही आपूर्ति
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सफेद पनीर का काला धंधा सहालग में जोरों पर है। जिले भर में रोजाना 20 से 25 टन पनीर की खपत हो रही है। इसमें से 40 फीसदी आपूर्ति निजी डेयरियों व अन्य माध्यमों से हो रही है। बाकी 60 फीसदी पनीर की मांग कहां से पूरी हो रही है, यह आम लोगों के लिए रहस्य बना हुआ है।
पड़ताल करने पर पता चला है कि इस मांग को पूरी करने के लिए रोडवेज की बसों से कानपुर, लखनऊ की मंडियों से पनीर की आपूर्ति की जा रही है। शहर के रोडवेज के आसपास सरकारी बसों से पनीर के गट्ठर रात के अंधेरे में गिराए जा रहे हैं। लंबी दूरी चलने वाली बसों को कैरियर बनाया जा रहा है। ज्यादातर सरकारी बस और ट्रैवल एजेंसियों की बसों से खेप बस्ती पहुंचाई जा रही है। भोर में हर्रैया, बस्ती रोडवेज, बड़ेवन, बभनान और मड़वानगर चौराहे पर बसों से पनीर के गट्ठर उतारे जा रहे हैं। यहां से फिर स्थानीय धंधेबाज इसकी सप्लाई कर रहे हैं।
दस दिन पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम भोर में पनीर की खेप पकड़ने के उद्देश्य से रोडवेज पहुंची। यहां सड़क के किनारे बोरियों में पैक मारकीन कपड़ों में बंधी पनीर बड़े पैमाने पर पाई गई। यह देख टीम का भी माथा ठनक गया। टीम धंधेबाजों की तह तक नहीं पहुंच सकी, लेकिन बाहर से मंगाए गए पनीर के नमूने जरूर भर लिए गए।
इसके अलावा ग्रामीण कस्बों की दुकानों पर धड़ल्ले से पाउडर से पनीर तैयार किया जा रहा है। दुकानदार बताते हैं कि अपनी जरूरत भर की पनीर वे खुद बनाते हैं। सवाल उठता है कि चाय के लिए दूध मुश्किल से मिल पाता है, तो पनीर के लिए दूध कहां से लाते होंगे। जाहिर है कि बाजार में खपाई गई सिंथेटिक पनीर ही उन्हें मिल पाती है।
भोर में पहुंच जाते हैं पनीर के गट्ठर
जानकारों के अनुसार प्रतिदिन 10 से 15 टन पनीर बाहर की मंडियों से यहां पहुंचाई जा रही है। भोर में 4:00 से सुबह 6:00 बजे तक मथुरा, कानपुर और लखनऊ की तरफ से आने वाली सरकारी बस एवं ट्रैवल एजेंसियों की बसों से गट्ठर में पनीर और खोवा निर्धारित अड्डों पर पहुंच रहा है। यहां से स्थानीय धंधेबाज इसकी आपूर्ति छोटे स्तर के विक्रेताओं के पास कर रहे हैं। इसके बाद मारकीन के कपड़े में बांधे गए सिंथेटिक पनीर को पानी से भरे बड़े पात्र में रखकर ताजा बताकर बेच दिया जा रहा है। ज्यादातर सिंथेटिक पनीर शादी- ब्याह के आयोजन में खपत हो रही है। इसके बाद शेष पनीर होटल, ढाबों और रेस्टोरेंटों में पहुंचाई जा रही है।
जिले भर में औसतन डेढ़ लाख लीटर दूध की खपत है। आकड़ों के मुताबिक जिले में 125703 गोवंशीय पशु हैं, जिनसे करीब एक लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें से आधे से ज्यादा दूध का उपयोग पशु पालक निजी उपयोग में ले रहे हैं। बाकी बचे दूध का बड़ा हिस्सा विभिन्न डेयरियों को चले जाते हैं। इससे बचने वाला दूध मिठाई की दुकानों और दूध के अन्य उत्पाद बनाने वालों को भेजे जाते हैं, जिससे मांग के अनुसार खोवा, पनीर जैसे उत्पाद नहीं बन पा रहे हैं। ऐसे धंधेबाजों ने मिलावट का रास्ता अख्तियार पनीर, खोवा जैसे दुग्ध उत्पाद की मांग रोजाना पूरी कर रहे हैं।
लागत अधिक, बिक्री कम में
मिलावटी पनीर का अंदाजा इसी से लगाया जा रहा है कि लागत के मुताबिक इसकी बिक्री कम दामों पर हो रही है। जानकारों के अनुसार दूध से शुद्ध पनीर तैयार करने में प्रतिकिलो 305 रुपये की लागत आ रही है, जबकि खुले बाजार में इसकी कीमत 260 रुपये प्रति किलो है। स्पष्ट है कि बिना मिलावट के यह खेल नहीं हो रहा है।
शुद्धता की आड़ में और मुनाफा
छोटे पैमाने पर पनीर का धंधा करने वाले कारोबारी सिंथेटिक पनीर से और अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। शहर के चौक- चौराहे पर दूधिया के वेश में जस्ता की बाल्टी में पनीर रखकर बैठने वाले इसकी कीमत प्रति किलो 300 रुपये कर दिए हैं। शहर के दीनानाथ बताते हैं कि दूधिया के वेश में भी लोग सिंथेटिक पनीर बेच रहे हैं। यह कारोबारी ग्राहक को विश्वास में लेने के लिए बाल्टी से शुद्ध पनीर का टुकड़ा निकालते हैं। इसके बाद तौल करते समय सिंथेटिक पनीर दे रहे हैं। घर पर पनीर बनाने के बाद स्वाद से पता चलता है कि यह सिंथेटिक है।
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लावारिश में लाया जा रहा पनीर का गट्ठर
रोडवेज या निजी बसों में जो पनीर या अन्य ऐसी चीजों के गट्ठर लाए जा रहे हैं लावारिश की तरह रखे जाते हैं। पूछताछ होने पता चलता है कि उस गट्ठर का कोई मालिक नहीं है, जबकि चालक-परिचालक की सहमति से मोटा किराया लेकर गाड़ी पर लदवाया जाता है। चालक-परिचालक फोन पर इसकी सूचना स्थानीय धंधेबाज को देकर आगे बढ़ जा रहे हैं। इसके बाद पनीर की यह खेप दुकानों पर पहुंचा दी जा रही है। जानकारों के अनुसार प्रतिदिन यहां 8 से 10 पनीर और 4 से 5 गट्ठर खोवा उतारा जा रहा है। इसी तरह मड़वानगर, बड़ेवन और रोडवेज पर भी पनीर और खोवा की खेप उतारी जा रही है।
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180 रुपये किलो के हिसाब से आ रही थोक में पनीर
सिंथेटिक पनीर स्थानीय एवं बाहर से 100 रुपये किलो के हिसाब से थोक में मंगाई जा रही है। यहां फुटकर दुकानदारों को 50 रुपये प्रति किलो मुनाफा लेकर 220 रुपये में बेच दिया जा रहा है। आम ग्राहक तक पहुंचते- पहुंचते इसकी कीमत 250 से 260 रुपये पहुंच जा रही है।
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ऐसे तैयार कर रहे मिलावटी पनीर
सिंथेटिक पनीर पाउडर वाले दूध से तैयार किया जा रहा है। इसमें बड़े धंधेबाजों के अलावा छोटे दुकानदार भी शामिल हैं। दूध और पानी में 40 फीसदी तक मिल्क पाउडर मिलाकर 200 से 400 डिग्री तापमान पर पकाए जाने के बाद ऊपर से रिफाइंड डालकर इसे फाड़ दिया जा रहा है। फिर ठंडा होने के बाद पनीर बनाया जा रहा है।
सिंथेटिक पनीर और नकली खोवा की धरपकड़ के लिए लगातार छापा मारा जा रहा है। रोडवेज के पास बाहर से मंगाई गई पनीर के नमूने लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई भी होगी।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी।