बस्ती। उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम में अब महिलाएं भी परिचालक के रूप में इस क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं। यह बदलाव न केवल रोजगार के अवसरों का विस्तार कर रहा है, बल्कि समाज में महिलाओं की स्थिति में सुधार और समानता की ओर भी एक कदम बढ़ाता नजर आ रहा है। ये महिलाएं परिवार का सहारा भी बनी हैं। अब रोडवेज की बसों में महिलाओं की यह भूमिका न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर रही है।
बता दें कि बस्ती डिपो में हाल में 15 महिला परिचालक की तैनाती हुई, जिसमें से एक की संविदा समाप्त हो चुकी है। शेष 14 महिला कंडक्टर कार्यरत हैं। सभी महिलाएं बस्ती-गोरखपुर, बस्ती-सिद्धार्थनगर, बस्ती-अयोध्या, अंबेडकरनगर रूट पर सेवाएं दे रहीं हैं। परिचालक सुमन, सुंदरी, रीमा आदि का कहना है कि बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले परिवहन क्षेत्र में महिलाओं का प्रवेश मुश्किल समझा जाता था। लेकिन अब परिवारों और समाज का समर्थन मिल रहा है, जिससे महिलाएं इस क्षेत्र में अपने कॅरियर को आगे बढ़ा रही हैं।
महिला परिचालकों ने कहा कि पहले लोग मुझे देखकर हैरान होते थे, लेकिन अब वे मुझे सम्मान से देखते हैं। यह काम मेरे आत्मविश्वास को बढ़ाता है और मुझे लगता है कि मैं समाज में बदलाव ला रही हूं। निगम अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं की इस पहल से समाज में एक सकारात्मक बदलाव आ रहा है। यह न केवल उनके लिए रोजगार का एक साधन है, बल्कि यह समाज में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
महिला परिचालक सुमन ने बताया कि दिन में ड्यूटी करने में कोई असुविधा नहीं होती। एक महिला कर्मी होने के नाते पुरुष यात्रियों से टिकट बनवाने के लिए पहले झिझक रहती थी, मगर ड्यूटी करते-करते अब अभ्यास हो गया है। इसी प्रकार सुंदरी का कहना है कि पुरुष परिचालक की तुलना में महिला कंडक्टर के सामने चुनौतियां तो हैं, मगर उन्हीं व्यवस्था में ड्यूटी करनी पड़ रही है। बस्ती रोडवेज निगम के बेड़े में निगम की 107 और अनुबंधित की 33 बसें संचालित हैं।
कोट
15 महिला परिचालक कार्यरत थीं, एक की संविदा समाप्त हो चुकी है। दो महिला कंडक्टर नई आई हैं, अब 14 ड्यूटी पर हैं, महिला परिचालक को सुविधाजनक रूट दिए जा रहे हैं, ताकि कोई परेशानी न हो। रात की ड्यूटी से महिलाओं को छूट दी गई है। नियम के तहत ड्यूटी लगाई जाती है। रेस्ट रूम अलग से है।
-आयुष भटनागर, एआरएम, बस्ती।