मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में बढ़ी मरीजों की संख्या।
बस्ती। बदलता मौसम डायबिटीज के मरीजों के लिए खतरनाक है। हल्की सी लापरवाही भारी पड़ जा रही है। वायरल बुखार, खांसी के अलावा फोड़ा-फुंसी भी नासूर बन जा रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि डायबिटीज कई तरह की बीमारियों की जननी है। सचेत नहीं रहेंगे तो शरीर के कई अंग कमजोर हो जाते हैं। लिवर, किडनी, हार्ट पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इस समय डायबिटीज के मरीज विभिन्न बीमारियों से पीड़ित हैं। ऐसे मरीज रोजाना मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं। मेडिसिन में विभाग में वायरल बुखार और खांसी के हर पांच मरीज में एक दो लोग डायबिटिज से ग्रसित पाए जा रहे हैं। डॉ. रजत पांडेय (एमडी) बताते हैं कि मौसम में तेजी से बदलाव हो रहा है। डायबिटीज के मरीजों को नियमित दवा लेनी चाहिए ताकि शुगर लेबल उनका नियंत्रण में रहे। शुगर बढ़ने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। इस वजह से बीमारियां पनपती है।
आजकर शुगर के मरीज ज्यादातर वायरल बुखार-खांसी की चपेट में आ रहे हैं। उन्हें बुखार-खांसी की दवा देने के साथ परहेज और शुगर की नियमित दवा लेने की सलाह दी जा रही है। बताया कि शुगर की दवा लेने में लापरवाही होने पर मरीज के लिवर, किडनी पर भी इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। डायबिटीज दीमक की तरह शरीर के आर्गन को कमजोर कर देता है। इसका पता बाद में चलता है।
वहीं, जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी कहते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के इलाज में बड़ी सावधानी बरतनी पड़ती है। इधर फोड़ा-फुंसी लोगों को ज्यादा हो रहे हैं। यदि डायबिटीज का मरीज है तो यह जल्दी ठीक ही नहीं हो रहे हैं। बताया कि एक दो ऐसे मरीज मिले, जिनके हल्के जख्म डायबिटीज की वजह से नासूर बन गए हैं। मरीज भी लापरवाही बरतते हैं। 300 से 400 शुगर लेबल पर भी लोग नियमित दवा और परहेज नहीं कर रहे हैं। बाद में उन्हें झेलना पड़ता है। जागरूक होकर ही डायबिटीज की बीमारी से लड़ा जा सकता है। मरीज को स्वयं संयमित होना पड़ेगा।