संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। छोटी छोटी बात पर आपा खो रहे युवक और किशोर गुस्से में प्राणघातक हमले जैसी घटनाओं को अंजाम दे दे रहे हैं। उन्हें यह भी पता नहीं चल रहा है कि इससे उनका भविष्य और दूसरे की जान खतरे में पड़ सकती है।
वहीं, पुलिस इन पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है। बावजूद इनके आचरण में सुधार नहीं हो रहा है। अपराध की तरफ बढ़ते कदम से अभिभावकों के साथ ही समाज शास्त्री और मनोचिकित्सक भी चिंतित हैं।
विशेषज्ञ इसके पीछे न्यूरोट्रांसमीटर को वजह बता रहे हैं। न्यूरोट्रांसमीटर में असंतुलन से युवाओं में गुस्सा उत्पन्न होता हैं। इसके अलावा एक वजह बचपन से अनुशासन में न रहना भी हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ : मेडिकल कॉलेज की मानसिक रोग विशेषज्ञ डाॅ. अंबु पांडे ने बताया कि इका पहला कारण जैनेटिक (आनुवंशिक) है।
यदि परिवार का आपराधिक इतिहास रहा है तो ऐसी प्रवृत्ति बच्चे में आ जाती है। युवा इस तरह का व्यवहार करने लगता है।
दूसरा कारण बच्चों को लगातार नजरअंदाज करना भी बच्चों में आपराधिक प्रवृत्ति को जन्म देता है। इसलिए अभिभावक बच्चों को कतई नजरअंदाज न करें। कुछ बच्चों में न्यूरोट्रांसमीटर स्रावित होने से उनमें उत्तेजना आती है।
यह क्षणिक होता है। इसके कारण बाइक तेज चलाने या फिर अपराध करने से उन्हें खुशी मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया को भी इसका एक कारण बताया।
संत विनोबा पीजी कॉलेज की मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष डॉ. तूलिका पांडेय ने बताया कि वर्तमान में युवाओं में हाइपर एक्टिव (अतिसक्रियता) की समस्या देखने को मिल रही है। साथ ही माइंड फुलनेस की कमी है। इससे वह सही व गलत में भेद नहीं कर पा रहे हैं। तनाव व चिंता बढ़ सकती है। मनमाफिक चीजें नहीं होने पर उन्हें गुस्सा आ रहा है। अभिभावक भी डर के मारे उन्हें कुछ कह नहीं पा रहे हैं।
आज का समाज पूरी तरह भौतिकवादी हो चुका है। माता-पिता हर सुख सुविधा अपने पाल्यों को उपलब्ध करा दे रहे हैं। पहले युवा डांट-फटकार बर्दाश्त कर लेते थे, अब प्रतिक्रिया कर दे रहे हैं। जिन चीजों को सहज भाव से लिया जा सकता है, उस पर कड़ी प्रतिक्रिया हो रही है। गुस्सा के चलते वह कुंठित होकर गलत रास्ता पकड़ ले रहे हैं।