...तेरे दरबार में ख्वाजा सिर झुकाते हैं
सूफी नाइट से सजी महोत्सव की चौथी महफिल
बस्ती। महोत्सव की चौथी रात सूफी की दीवानगी की थी। दीवाना ग्रुप की शानदार प्रस्तुति देख दर्शक भी शांति चित्त देर रात तक कार्यक्रम का लुत्फ उठाते रहे। प्रस्तुति की शुरुआत ख्वाजा मेरे ख्वाजा दिले में समा जा तेरे दरबार में ख्वाजा सर झुकाते हैं... से की।
दीवाना ग्रुप की अगली प्रस्तुति ये जो हल्का हल्का सुरूर है, तेरी नजर का कुसूर है कि शराब पीना सिखा दिया... तो दर्शक भी झूमने और सुर में सुर मिलाने लगे। दर्शकों के मनोभाव देखकर दीवाना ग्रुप ने एक से बढ़कर एक शानदार प्रस्तुति सूफी नृत्य के साथ दी। बढ़ते क्रम में मेरी दोस्ती की बलाएं ले लो, किस्मत में मेरी चैन से जीना सिखा दे, और एक पल भी चैन न आवे सजना तेरे बिना... की प्रस्तुति ने दर्शकों को अपना दीवाना बना लिया। जिसके बाद तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी, मोहब्बत के राहों में आकर देखो, कभी दिल किसी से लगाकर देखो, बस इतना समझ लीजिए इश्क इतना नहीं आसां, आग का दरिया है और डूब कर जाना है... की प्रस्तुति पर दर्शक भी गाने लगे।
सूफी गीत आ जा सजना इन नैनन में, पलक उठाऊं तो न देखूं किसी और को... की प्रस्तुति से माहौल का सूफियाना बना दिया। यही इश्क की मरजी है यही रब की मरजी है, इश्क जुनून जब हद से बढ़ जाए, तू ने क्या कर डाला मर गई... आदि सूफी गीत पर लोग झूमते रहे। जिसके बाद इश्क जब एक तरफ गर हो तो सजा देता है और जब दोनों तरफ हो तो मजा देता है... सुन दर्शक भी खड़े होकर ताल मिलाने लगे। महफिल की ऊंचाइयों को पहुंचाने के लिए फिर तोरे नैना बड़े दगा बाज रे, भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, मेरे रस्के कमर... आदि फिल्मी धुनों के गीतों को सुनाकर समां बांध दी। अंत में जाते जाते अच्छा चलता हूं, दुआओं में याद रखना... सुनाकर कार्यक्रम की समाप्ति की।