मुझे वो मारकर खुश हैं कि सारा राज उनका है...
बस्ती। सर्द रात में बस्ती महोत्सव का आगाज जरूर हुआ, लेकिन कवियों की कल्पनाओं और व्यंग बाणों ने तन-मन में जोश भर दिया। कवि कुमार विश्वास ने कविताओं में दिल्ली के सीएम केजरीवाल को निशाने पर रखा, वहीं भाजपा और कांग्रेस पर भी व्यंग बाण चलाने से नहीं चूके।
महोत्सव की रात 12 बजे जब तालियों की गड़गड़ाहट हुई तो तस्वीर साफ हो गई थी कि डॉ. कुमार विश्वास आज मूड में हैं। माइक संभाले ही थे कि पंडाल में उत्साही युवाओं ने ‘कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है’की फरमाइश शुरू कर दी, लेकिन कुमार विश्वास ने गाने के बजाय पहला व्यंग दिल्ली के सीएम केजरीवाल पर किया ‘मुझे वो मारकर खुश हैं कि सारा राज उस पर है, यकीनन कल है मेरा आज, बेशक आज उस पर है। उसे जिद थी झुकाओ सर तभी दस्तार बाधूंगा, मैं अपना सर बचा लाया, महल और ताज उस पर है’। कांग्रेस युवराज पर कहा कि ‘इस अधूरी जवानी का क्या फायदा, न बहू न बहुमत बिन कथानक कहानी का क्या फायदा’। पीएम मोदी पर कहा कि ‘जिसमें धुलकर नजर भी न पावन बनी, आंखों में ऐसे पानी का क्या फायदा’। फिर ज्यों-ज्यों रात ढलती गई त्यों-त्यों कुमार विश्वास ने अपनी सुर लहरियों से लोगों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। दिनचर्या बताई ‘तुम्हारी और हमारी रात में फर्क बस इतना है, तुम्हारी सो के गुजरी है हमारी रो के गुजरी है। हवा का काम है चलना, दिये का काम है जलना, वो अपना काम करती है, मैं अपना काम करता हूं’। चंद्रयान के लैंडिंग नहीं होने पर यूरोप और पाक की खुशियों पर करारा हमला किया एशिया के हम परिंदे आसमां है हद हमारी, जानते हैं चांद-सूरज जिद हमारी जद हमारी।
इससे पहले भोपाल से आए वीर रस के कवि मदन मोहन समर्थ ने आंतकी घटनाओं और साजिशों पर जनमानस को सचेत किया ‘ये वक्त बहुत नाजुक है, हम पे हमले पे हमले हैं, दुश्मन के हर हमले में संभले हैं हम। शत्रु की साजिश समुख जिनका स्वाभिमान बढ़ा, जिनके कतरे से यह हिंदुस्तान’ बना आदि कविताओं से महापुरुषों और आजादी के दीवानों को याद किया। दिल्ली से पधारीं मुमताज नसीम ने युवा धड़कनों की नब्ज टटोली। कहा कि ‘दिल धड़कता है हर पल तुम्हारे लिए, ऐसा महसूस होन लगा है मुझे मैं पागल हो गई हूं तुम्हारे लिए’ इतना सुनते ही श्रोताओं से भरे पंडाल में मस्ती छा गई। मुमताज ने अगला नब्ज सुनाया ‘सुबह आने लगा, शाम आने लगा। मेरे होठों पर इक नाम आने लगा’ इतना सुनते ही तालियों और सीटियों से पंडाल गूंजने लगा। अंत में कहा कि ‘उड़ती चिड़ियां भी हूूं, मुझ पर पहरा भी है। हां खुशी पर जख्म गहरा भी है’। विदाई लेते हुए नब्ज पढ़ी ‘जेवर के बक्से में रख लूंगी मैं, आज पीतल की पायल तुम्हारे लिए’। दिनेश बावरा और इंदौर के अमन अक्षर की कविताओं ने लोगों में नई उमंग पैदा की। इस दौरान सांसद हरीश द्विवेदी, विधायक अजय सिंह, आईजी आशुतोष, डीएम आशुतोष निरंजन, एसपी हेमराज मीणा आदि मौजूद रहे।