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पूर्व प्रधान हत्याकांड: पांच हत्यारोपी गिरफ्तार

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परशुरामपुर क्षेत्र में पूर्व प्रधान साहबदीन के हत्यारोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार। - फोटो : BASTI
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पूर्व प्रधान हत्याकांड के पांच आरोपी गिरफ्तार
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साहबदीन यादव की हत्या के तीन आरोपी अब भी फरार
मंगलवार को नारायणपुर बाजार में हुई थी पीटकर हत्या
अमर उजाला ब्यूरो
परशुरामपुर (बस्ती)। विकास क्षेत्र की धोबही ग्राम पंचायत के पूर्व प्रधान साहबदीन यादव के हत्यारोपियों में से पांच को पुलिस ने शुक्रवार की सुबह गिरफ्तार कर लिया। 27 जुलाई को दिनदहाड़े नारायणपुर बाजार में लाठी-डंडे से पिटाई कर दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
मृतक के बेटे वशिष्ठ यादव की तहरीर पर आठ लोगों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा पंजीकृत किया। इसमें सरजू प्रसाद पांडेय, रामू पांडेय, सुरेंद्र पांडेय निवासीगण धोबही, अजय शुक्ल निवासी परसपुर व नारायणपुर के रणजीत सिंह, प्रमोद कुमार सिंह उर्फ मंटू, शिव कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह आदि शामिल थे। परशुरामपुर के थानेदार शमशेर बहादुर सिंह का कहना है कि घघौवा पुल के समीप मुखबिर की सूचना पर नामजद आरोपी सरजू प्रसाद पांडेय, रामू पांडेय, सुरेंद्र पांडेय निवासीगण धोबही, अजय शुक्ल निवासी परसपुर व नारायणपुर के रणजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। शेष तीन आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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यह है घटनाक्रम
27 जुलाई को दिन में करीब एक बजे धोबही के पूर्व प्रधान साहबदीन यादव नारायणपुर की एक दुकान पर बैठे थे। इसी दौरान पांच-सात लोग लाठी-डंडा लेकर पहुंचे और गाली देने लगे। जैसे ही उसने विरोध किया तो सभी लाठी-डंडे से पीटने लगे। पिटाई में पूर्व प्रधान के दोनों हाथ, दोनों पैर के अलावा सिर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। मरणासन्न हालत में उन्हें छोड़कर हमलावर पैदल ही निकल गए। इसकी सूचना जब पूर्व प्रधान के घर पहुंची तो परिवार के लोग पहुंचे और गाड़ी में बैठाकर साहबदीन को लेकर थाने ले गए। पुलिस ने पहले इलाज कराने की नसीहत देकर टाल दिया। परिवार के लोग उन्हें लखनऊ ले जा रहे थे मगर रास्ते में मौत हो गई।
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राजनीति से जोड़कर देखी जा रही घटना
पूर्व प्रधान की हत्या के पीछे वजह तलाशने में पुलिस अब तक नाकाम है या खुलासा करने से डर रही है, इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। चूंकि राजनैतिक हत्याओं के लिए यह क्षेत्र काफी पहले से सुर्खियों में रहा है। इसलिए लोग यह बात हजम नहीं कर पा रहे हैं कि पुलिस अब तक अनभिज्ञ है। 27 जुलाई से लेकर अब तक की तफ्तीश में पुलिस काफी कुछ जुटा चुकी है लेकिन कतिपय दबाव के कारण जुबान खोलने से डर रही है। थानेदार शमशेर बहादुर सिंह का कहना है कि बिना तथ्य व सुबूत के कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
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