केसीसी वितरण में फिसड्डी साबित हो रहे बैंक
बस्ती। किसान क्रेडिट कार्ड वितरण मामले में लगभग सारे बैंक फिसड्डी साबित हो रहे हैं। वित्तीय वर्ष समाप्ति में महज तीन महीने बचे हैं और लगभग 75 प्रतिशत किसानों के पास क्रेडिट कार्ड नहीं है। बैंकिंग और प्रशासनिक अव्यवस्था के चलते किसान क्रेडिट कार्ड लेने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। वहीं पूंजी न होने से खेती उनके लिए घाटे का सौदा साबित होता जा रहा है।
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए शासन स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से उन्हें खेती के लिए पूंजी उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड योजना जिले में सिर नहीं उठा पा रही है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में अभी तक महज 22 फीसदी किसानों को ही क्रेडिट कार्ड वितरित किया जा सका है। जबकि अभिलेखानुसार जिले में 4.48 लाख किसान हैं। इसमें महज 102089 किसानों क्रेडिट कार्ड धारक हैं। जिसमें 89 हजार कार्डों पर ही समय से लेने देने हो रहा है। लीड बैंक मैनेजर अविनाश चंद्र ने बताया कि बैंकिंग नियमानुसार लगातार तीन महीने तक ईएमआई न देने पर खाता नॉन परफार्मिंग असेट (एनपीए) हो जाता है। खाता एनपीए होने पर लोन देने वाले शाखा प्रबंधक पर कार्रवाई तक हो जाती है। ऐसे में शाखा प्रबंधक केसीसी बनाने में हिचकते हैं।