बस्ती। आशा एवं आशा संगिनियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करते हुए निश्चित मासिक मानदेय एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान किए जाने की मांग को लेकर शुक्रवार को मंडल के तीनों जिलों की आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्रियों ने एडी हेल्थ कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन किया। धरने के बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एडी हेल्थ को सौंपा और हक मांगा।
आशा बहु स्वास्थ्य समिति उत्तर प्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष नीलम शुक्ला ने कहा कि आशा कार्यकर्ता वर्ष 2006 से नियमित रूप से भारत सरकार एवं राज्य सरकार के दिशा निर्देशानुसार राज्य कर्मचारियों की भांति कार्य कर रही हैं, किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकारों की ओर से यह कहते हुए हमें हमारे अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है कि आपकी परिकल्पना स्वयं सेवक/वालंटियर के रूप में की गई है।
उन्होंने कहा कि ध्यान देने की बात यह है कि उस समय जब आशा का चयन किया गया था तो उनके कार्य व दायित्व काफी सीमित थे। वर्तमान में आशा स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ के तौर पर काम कर रही हैं। जिम्मेदारियां काफी व्यापक हो गई हैं। दिन प्रतिदिन काम का बोझ बढ़ाया जा रहा है। प्रदेश संरक्षक/सदस्य प्रदेश कार्यकारिणी सुभाष चंद्र उपाध्याय ने कहा कि वालंटियर के रूप में कार्यरत होमगार्ड्स के जवानों को वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा के साथ भारत सरकार की ओर से प्रदान किए जा रहे अन्य लाभ भी दिए जा रहे हैं, लेकिन आशा एवं आशा संगिनियों के साथ दोहरी नीति अपनाई जा रही है।
प्रदेश कोषाध्यक्ष सुनीता वर्मा ने कहा कि 45वें भारतीय श्रम सम्मेलन में यह तय हुआ था कि आशा एवं आशा संगिनी कार्यकत्रियों को कर्मचारी के रूप में वर्गीकृत किया जाए और इन्हें प्रोत्साहन राशि के बजाय न्यूनतम वेतन एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान किया जाए, किन्तु दुर्भाग्यपूर्ण है कि 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को अभी तक लागू नहीं किया गया। कहा कि हमारी मांग है कि सरकार राज्य कर्मचारी का दर्जा एवं सामाजिक सुरक्षा हम आशा एवं आशा संगिनी को प्रदान करे।
इस दौरान कांती तिवारी, सुशीला देवी, सरोज पादव, प्रीती उपाध्याय, रीना सिंह, मालती, सरिता सिंह, श्वेता पांडेय, विकलेश त्रिपाठी, नीलम यादव सहित अन्य मौजूद रहीं।
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