बस्ती। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (ऊपरी श्वसन तंत्र संक्रमण) के मामले बढ़ने लगे हैं। बारिश, धूप और उमस के बीच बच्चों में बुखार, खांसी, जुकाम और गले में दर्द की शिकायत सामने आ रही है। चिकित्सकों के अनुसार, तीन-चार दिन में सुधार न होने या सांस लेने में परेशानी होने पर लापरवाही न बरतें और तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि मौसम बदलने के साथ बच्चों में श्वसन तंत्र और गले से संबंधित संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। संक्रमण की चपेट में आने पर तेज बुखार, लगातार खांसी, बहती नाक और जुकाम जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। यदि तीन-चार दिन बाद भी बच्चे की हालत में सुधार नहीं होता या लक्षण बढ़ने लगते हैं तो तत्काल चिकित्सक को दिखाना चाहिए। संक्रमण गंभीर होने पर बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। ऐसे मामलों में अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ रही है। चिकित्सकीय जांच के बाद जरूरत के अनुसार बुखार की दवाएं और अन्य उपचार दिए जाते हैं। शुरुआती दौर में बच्चे की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
फिजीशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि वायरल बुखार के कारण कुछ मरीजों में बीपी और ब्लड शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव की समस्या सामने आ रही है। इसमें युवा भी शामिल हैं। गलत खानपान और बदली दिनचर्या भी परेशानी बढ़ा रही है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ रहा है।
सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 1176 मरीजों को परामर्श दिया गया। इनमें मेडिसिन और बाल रोग विभाग में सबसे अधिक मरीज पहुंचे।
ईएनटी सर्जन डॉ. एसएस कन्नौजिया ने बताया कि धूप, छांव, उमस और बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ने से गले में खराश और संक्रमण की समस्या बढ़ रही है। इससे गले में दर्द और अन्य परेशानी हो सकती है।
तीन-चार दिन घरेलू उपचार से नहीं सुधरी सेहत तो पहुंच रहे अस्पताल
वायरल बुखार और श्वसन संक्रमण के शुरुआती लक्षणों में कई लोग घरेलू उपचार कर रहे हैं। तीन-चार दिन में राहत न मिलने और हालत बिगड़ने पर मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लक्षण गंभीर होने पर उपचार में देरी नहीं करनी चाहिए।
वायरल बुखार से मधुमेह रोगियों की बढ़ी परेशानी
वायरल बुखार के दौरान मधुमेह रोगियों में ब्लड शुगर का स्तर घटने-बढ़ने की समस्या हो सकती है। चिकित्सकों के अनुसार, बुखार के दौरान शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय होने से ब्लड शुगर बढ़ सकता है। ऐसे मरीजों को नियमित रूप से शुगर की निगरानी करने और चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।
इसका रखें ध्यान
बारिश और नम मौसम में बच्चों को अनावश्यक रूप से बाहर न निकालें। इस मौसम में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
घर या बाहर किसी व्यक्ति को खांसी-जुकाम हो तो उसे बच्चों के संपर्क में आने से बचाएं।
मां को खांसी या जुकाम है तो बच्चे को दूध पिलाते समय मास्क का इस्तेमाल करें और हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखें।
बच्चों में बुखार, खांसी-जुकाम या सांस संबंधी लक्षण दिखाई दें तो लापरवाही न बरतें।
तीन-चार दिन में सुधार न होने या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श लें।
समय से उपचार पर जोर
मौसम बदलने से वायरल फीवर और मधुमेह वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। चिकित्सकों को समय से मरीजों का उपचार करने के निर्देश दिए गए हैं। ओपीडी की निगरानी भी की जा रही है।
- डॉ. अनिल कुमार, एसआईसी, जिला अस्पताल, बस्ती